Greater Noida News: गौतमबुद्धनगर की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत ने एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कासना निवासी भूपेंद्र उर्फ कुनाल और भगत उर्फ कालू को सभी आरोपों से बरी कर दिया है. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा और प्रस्तुत साक्ष्य झूठे व गढ़े हुए प्रतीत होते हैं. मामला नाबालिग का अपहरण कर गैंगरेप से जुड़ा था.
मेडिकल और डीएनए रिपोर्ट में नहीं मिला साक्ष्य
अदालत ने कहा कि मेडिकल परीक्षण और डीएनए रिपोर्ट से यह सिद्ध नहीं हुआ कि पीड़िता के गर्भ में पल रहा बच्चा आरोपियों का था. इस आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया.
यह था मामला
मामला वर्ष 2021 का है. शिकायतकर्ता ने कासना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 9 जून 2021 को उनकी नाबालिग बेटी किराने का सामान खरीदने के लिए निकली थी, तभी आरोपियों ने उसे नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया और अपहरण कर गैंगरेप किया. आरोप यह भी था कि आरोपियों ने घटना की वीडियो बनाकर पीड़िता को ब्लैकमेल करते हुए बार-बार यौन शोषण किया.
गर्भवती होने की कही बात
पीड़िता ने शर्म और समाज के डर से घटना की जानकारी किसी को नहीं दी, लेकिन जब वह गर्भवती हुई तो परिवार को मामले की जानकारी हुई. इसके बाद मामला पॉक्सो एक्ट, एससी-एसटी एक्ट और आईपीसी की धारा 328, 365, 376डी, 504, 506 के तहत दर्ज किया गया था.
7 गवाह हुए पेश
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में सात गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, लेकिन कोई भी गवाह आरोपियों के विरुद्ध ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका. अदालत ने कहा कि सिर्फ आरोप लगाना पर्याप्त नहीं, जब तक कि उन्हें वैज्ञानिक या प्रत्यक्ष साक्ष्य से प्रमाणित न किया जाए.
अदालत की टिप्पणी
फैसले में अदालत ने टिप्पणी की कि समाज में गंभीर अपराधों के झूठे आरोप लगाने से निर्दोष व्यक्तियों का जीवन प्रभावित होता है और न्याय प्रक्रिया पर अविश्वास पैदा होता है. इसलिए ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों को साक्ष्यों की निष्पक्ष और गहन पड़ताल करनी चाहिए.