खबर की मुख्य बातें:-

  • गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे करीब 750 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होगा, जो गंगा एक्सप्रेसवे से भी बड़ा माना जा रहा है.
  • एक्सप्रेसवे बनने के बाद गोरखपुर से पानीपत का सफर 12-14 घंटे से घटकर लगभग 7-8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा.
  • यह परियोजना उत्तर प्रदेश के 22 जिलों को जोड़ते हुए हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर तक बेहतर सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगी.
  • NHAI ने परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है और करीब 133 गांवों की जमीन प्रभावित हो सकती है.

उत्तर प्रदेश वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है, राज्य में सड़क नेटवर्क को और मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ी पहल की जा रही है. राज्य को जल्द गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे की सौगात मिल सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे करीब 750 किलोमीटर लंबा होगा, जो गंगा एक्सप्रेसवे से भी बड़ा माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इस नए एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के तैयार होने से पूर्वी यूपी, पश्चिमी यूपी और हरियाणा के बीच की यात्रा पहले से कहीं आसान और सुविधाजनक हो सकेगी और साथ ही, इस रूट पर पड़ने वाले जिलों को भी इसका अच्छा फायदा हासिल होगा. इस परियोजना का तेजी से आगे बढ़ाते हुए , NHAI ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें:- यूपी वालों की बल्ले-बल्ले, इन 5 जिलों की को मिलेगी फोर लेन कनेक्टिविटी; 154 KM हाइवे के

---विज्ञापन---

सिर्फ 7-8 घंटे में होगा गोरखपुर से पानीपत का सफर

वर्तमान में गोरखपुर से दिल्ली या हरियाणा के कई शहरों तक पहुंचने में 12 से 14 घंटे का समय लग जाता है, अगर रास्ते में किसी तरह का ट्रैफिक मिल जाए, तो यह समय बढ़ भी जाता है. लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के पूरा होने से यही सफर करीब 7-8 घंटे में पूरा हो सकेगा. तेज रफ्तार और बेहतर सड़क सुविधा से यात्रियों को आरामदायक और थकाऊ यात्रा से राहत तो मिलेगी ही, साथ ही व्यापार, पर्यटन, रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

---विज्ञापन---

22 जिलों की चमकने वाली है किस्मत

प्रस्तावित गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लगभग 22 जिलों को जोड़ने का काम करेगा. यह मार्ग सिद्धार्थनगर के बांसी क्षेत्र से राज्य में प्रवेश करेगा और संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, बलरामपुर, बहराइच, अयोध्या, लखनऊ, शाहजहांपुर, बदायूं, मुरादाबाद, मेरठ और शामली सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरेगा. इसके बाद एक्सप्रेसवे को हरियाणा के पानीपत तक जोड़ा जाएगा, जिससे पूर्वांचल के लोगों की दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगी.

---विज्ञापन---

कितने करोड़ की लागत से तैयार होगा ये शानदार एक्सप्रेसवे?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ग्रीनफील्ड योजना का अहम हिस्सा है. इसकी अनुमानित लागत अभी 35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है. बता दें कि शुरुआती चरण में इसे 6 लेन के रूप में तैयार किया जाएगा, जबकि भविष्य में इसी एक्सप्रेसवे को 8 लेन तक चौड़ा किया जाएगा. आधुनिक तकनीक और बेहतर डिजाइन के साथ यह एक्सप्रेसवे लंबी दूरी की यात्रा को ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक बनाएगा, जिससे दोनों राज्यों के बीच की कनेक्टिविटी मजबूत होगी.

---विज्ञापन---

133 गांव की जमीन होंगी प्रभावित

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. हालांकि, बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट से उत्तर प्रदेश के लगभग 133 गांवों की जमीन इस परियोजना से प्रभावित हो सकती है. प्रशासन प्रभावित किसानों से नियमों के अनुसार जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया पूरी करेगा, जिससे इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी. परियोजना के पूरा होने के बाद स्थानीय क्षेत्रों में रोजगार, निवेश और अन्य विकास को भी नई रफ्तार मिलने की संभावना है.

विषयजानकारी
परियोजना का नामगोरखपुर-पानीपत ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
कुल लंबाईलगभग 750 किलोमीटर
निर्माण एजेंसीराष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
अनुमानित लागत₹35,000 करोड़ से अधिक
लेनशुरुआत में 6 लेन, भविष्य में 8 लेन तक विस्तार
यात्रा समयगोरखपुर से पानीपत लगभग 7-8 घंटे (वर्तमान 12-14 घंटे)
यूपी के कितने जिले जुड़ेंगेउत्तर प्रदेश के लगभग 22 जिले
प्रमुख जिलेसिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, बलरामपुर, बहराइच, अयोध्या, लखनऊ, शाहजहांपुर, बदायूं, मुरादाबाद, मेरठ, शामली आदि
भूमि अधिग्रहणप्रक्रिया शुरू, लगभग 133 गांव प्रभावित हो सकते हैं
मुख्य लाभतेज यात्रा, बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन, निवेश, उद्योग और रोजगार को बढ़ावा

रूट में मौजूद जिलों व शहरों को कैसा होगा इस प्रोजेक्ट से फायदा

इस एक्सप्रेसवे के तैयार होने से न सिर्फ यात्रा का समय कम होगा, बल्कि यह कई मायनों में लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. दोनों राज्यों में मौजूद किसानों व अन्य व्यापारियों को माल ढुलाई आसान होगी, परिवहन लागत कम होगी और औद्योगिक क्षेत्रों को तेज कनेक्टिविटी मिलेगी. इसके साथ ही पर्यटन, कृषि उत्पादों की सप्लाई और निवेश के नए अवसर भी बढ़ेंगे. कुल मिलाकर इस प्रोजेक्ट का पूरा होना काफी जरूरी दिखाई देता है.

मुख्य निष्कर्ष-  गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है. इसके बनने से पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली-NCR के बीच यात्रा तेज और आसान होगी. साथ ही 22 जिलों में औद्योगिक विकास, व्यापार, पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

यह भी पढ़ें:- अयोध्या चढ़ावा चोरी केस में SIT के रडार पर 30 और कर्मचारी, इन नियुक्तियों पर गहराया शक