CJP Protest in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में छात्रों का एक बहुत बड़ा प्रदर्शन हो रहा है. इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी कर रही है. नीट और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर युवा बेहद गुस्से में हैं. दिल्ली और पुणे में सफल आंदोलन करने के बाद अब सीजेपी ने उत्तर प्रदेश के छात्रों के साथ मिलकर लखनऊ में मोर्चा खोल दिया है. इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले सिस्टम के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना है.

क्या है अभिजीत दीपके का मुख्य एजेंडा?

सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके इस आंदोलन के मुख्य चेहरे हैं और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. अभिजीत दीपके का मुख्य एजेंडा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना है. उनका कहना है कि सरकार को यह तय करना होगा कि देश के लिए एक करोड़ छात्रों का भविष्य जरूरी है या एक मंत्री का पद. वह इस आंदोलन के जरिए परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार लाना चाहते हैं ताकि आने वाले समय में किसी भी छात्र की मेहनत बेकार न जाए. वह सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक युवाओं को उनके अधिकारों के लिए एकजुट कर रहे हैं.

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आंदोलनकारी छात्रों की सरकार से मुख्य मांगें

इस पूरे आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है. सीजेपी का आरोप है कि एनटीए जैसी बड़ी एजेंसियों की लापरवाही की वजह से एक करोड़ से अधिक छात्रों के साथ अन्याय हुआ है. इसके अलावा संगठन ने एक 'एग्जाम मेनिफेस्टो' भी जारी किया है. इस मेनिफेस्टो के तहत मांग की गई है कि अगर कोई भी पेपर लीक या परीक्षा रद्द होती है, तो प्रभावित छात्रों को आर्थिक मुआवजा दिया जाए. साथ ही परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और रिजल्ट समय पर जारी करने के लिए कड़े नियम बनाने की बात कही गई है.

देश के अन्य शहरों में कैसे बढ़ रहा है आंदोलन?

यह आंदोलन केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रहने वाला है बल्कि इसे पूरे देश में फैलाने की तैयारी है. अभिजीत दीपके के मुताबिक पुणे और लखनऊ के बाद इस आंदोलन को जयपुर, अमृतसर और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में ले जाया जाएगा. इसके बाद 20 जून को देश भर के छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर इकट्ठा होकर एक बहुत बड़ा प्रदर्शन करेंगे. युवाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और पेपर लीक जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण और संवैधानिक संघर्ष लगातार जारी रहेगा.