अंधविश्वास, शराब, भाई की मौत… कैसे हैवान बना अरविंद? आजमगढ़ हत्याकांड में चौंकाने वाले दावे

Azamgarh murder case: आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में शराब की लत और मृत भाई की आत्मा की शांति के लिए चल रहा अनुष्ठान खूनी खेल में बदल गया. घर में पूजा देख भड़के अरविंद सिंह ने पत्नी, बच्चे और दो पुजारियों की गोली मारकर जान ले ली. जानिए अंधविश्वास से जुड़े इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड में चौंकाने वाले दावे?

Azamgarh murder case, superstitious killing

आजमगढ़ जिले में मंगलवार शाम दिल दहला देने वाली घटना के पीछे अब अंधविश्वास और भूत-प्रेत का खौफनाक पहलू सामने आया है. credit: AI

Azamgarh murder case: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहिरौला थाना क्षेत्र स्थित शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम घटी दिल दहला देने वाली घटना के पीछे अब अंधविश्वास और भूत-प्रेत का खौफनाक पहलू सामने आया है. जिस घर में कलह और शराब की लत छुड़ाने के लिए शांति पाठ चल रहा था, वहां अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी और देखते ही देखते चार जिंदगियां हमेशा के लिए खामोश हो गईं. पुलिस पूछताछ में आरोपी अरविंद सिंह के परिजनों ने दावा किया कि अरविंद पर ‘भूत का प्रभाव’ था और वह बेतहाशा शराब पीता था. उसके असामान्य व्यवहार से परिजन डर चुके थे. अरविंद की पत्नी बबीता का मानना था कि उनके पति किसी अदृश्य साये के वश में हैं. इसी साये और लत से छुटकारा दिलाने के लिए बबीता ने घर पर तांत्रिक-धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया था.

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मृत भाई की आत्मा को शांति देने की कोशिश

घटनास्थल से जान बचाकर भागे एक पुजारी ने पुलिस को जो बताया, वह बेहद चौंकाने वाला है. पुजारी के मुताबिक, यह अनुष्ठान सिर्फ अरविंद के व्यवहार तक सीमित नहीं था, बल्कि परिवार को डर था कि दो साल पहले जान गंवाने वाले अरविंद के बड़े भाई की आत्मा भटक रही है और उसे शांति नहीं मिली है. इसी ‘मुक्ति’ के चक्कर में परिवार ने अनुष्ठान की राह चुनी.

घर में कदम रखते ही भड़क उठा आरोपी

मंगलवार शाम करीब 6 बजे जब अरविंद घर लौटा तो उसने देखा कि घर के अंदर पूजा चल रही है. वहां उसकी 70 वर्षीय मां समला देवी, पत्नी बबीता और तीन मासूम बच्चे मौजूद थे. अरविंद इस पूजा के सख्त खिलाफ था. घर में अनुष्ठान देखते ही उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. उसने अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिसमें उसकी पत्नी बबीता, दो पुजारी और उसके तीन बच्चों में से एक मासूम की मौके पर ही मौत हो गई.

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वारदात के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अरविंद सिंह को गोली मार दी. आजमगढ़ एसएसपी अनिल कुमार के मुताबिक, परिवार का मानना था कि अरविंद भूत-प्रेत के वश में था और समाधान के लिए पूजा रखी गई थी, जिसके अरविंद खिलाफ था. पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है.

घर में पूजा करा रहे पुजारियों से पहचान पत्र मांगा

घर में पूजा होते देख अरविंद सिंह जैसे ही अपने घर पहुंचा, उसने वहां चार पुजारियों को देखा. उसने कथित तौर पर पुजारियों से उनकी पहचान पत्र दिखाने को कहा. इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस छिड़ गई. विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में आगबबूला अरविंद अंदर गया और अपनी लाइसेंसी राइफल निकाल लाया. उसने सबसे पहले अपनी 40 वर्षीय पत्नी बबीता सिंह को गोली मारी और फिर दो पुजारियों पर भी अंधाधुंध फायरिंग कर दी. वारदात में पत्नी बबीता के अलावा पटखौली गांव के पुजारी महेंद्र पाठक और छिताउना भाटौली गांव के अखिलेश मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गई.

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बच्चों को बंधक बनाकर कमरे में छिपा, एक बेटे को गोली मारी

तीनों की हत्या करने के बाद नशे में धुत आरोपी ने अपने तीन मासूम बच्चों के साथ खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. सूचना पर पहुंची पुलिस और रिश्तेदारों ने करीब 7 घंटे तक अरविंद से बात कर आत्मसमर्पण करने और बच्चों को छोड़ने की गुहार लगाई, लेकिन वह नहीं माना और सुबह बात करने की जिद पर अड़ा रहा. समझाने-बुझाने के दौरान ही कमरे के अंदर से अचानक एक और गोली चलने की आवाज आई. आरोपी ने अपने ही बेटे शौर्य सिंह को गोली मार दी थी. बाकी बच्चों की जान खतरे में देख पुलिस टीम तुरंत दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी.

अरविंद ने पुलिस पर भी फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने नियंत्रित गोलीबारी की जिसमें आरोपी घायल हो गया. अस्पताल ले जाने पर इलाज के दौरान आरोपी अरविंद और उसके घायल बेटे शौर्य दोनों ने दम तोड़ दिया.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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