Azam Khan Tankhaiya Case: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी करने के चर्चित 'तनखैया' बयान मामले में आजम खान को रामपुर सत्र न्यायालय से करारा झटका लगा है. एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश डॉ. विजय कुमार ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर आजम खान की अपील को पूरी तरह निरस्त कर दिया है. इसके साथ ही अदालत ने उनकी दो साल की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है.
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यह पूरा मामला साल 2019 के लोकसभा चुनावों से जुड़ा है, जब आजम खान रामपुर संसदीय क्षेत्र से सपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे थे. चुनाव प्रचार के दौरान थाना भोट क्षेत्र के ग्राम मनकरा में आयोजित एक रैली में उन्होंने तत्कालीन डीएम और जिला प्रशासन के अधिकारियों पर बेहद तीखी और अमर्यादित टिप्पणी की थी. इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था. अपने भाषण में उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट को 'तनखैया' यानी केवल एक वेतनभोगी कर्मचारी कहकर संबोधित किया था. इतना ही नहीं, उन्होंने मंच से लोगों से अधिकारियों से न डरने की अपील करते हुए यह तक कह दिया था कि चुनाव जीतने के बाद वे उस अधिकारी से अपने 'जूते साफ करवाएंगे'.
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इस भड़काऊ और अमर्यादित भाषण के खिलाफ तत्कालीन एसडीएम घनश्याम त्रिपाठी की शिकायत पर थाना भोट में मामला दर्ज कराया गया था. मामले की लंबी सुनवाई के बाद निचली अदालत ने आजम खान को दोषी ठहराते हुए दो साल के कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. इसी फैसले को चुनौती देते हुए आजम खान के वकीलों ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी. मामले की जानकारी देते हुए सहायक सरकारी जिला शासकीय अधिवक्ता (एजीडीसी) सीमा राणा ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निचली अदालत के निर्णय को सही ठहराया और अपील खारिज कर दी. इस पूरे प्रकरण में आजम खान ही एकमात्र आरोपी हैं.
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