अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की लागत को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है. मंदिर निर्माण से जुड़े वित्तीय पहलुओं पर सवाल उठाते हुए महिपाल सिंह ने दावा किया है कि परियोजना के शुरुआती अनुमान और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर है. उन्होंने इस संबंध में विशेष जांच दल (SIT) को दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सौंपने की बात कही है.
महिपाल सिंह का आरोप है कि मंदिर निर्माण के लिए शुरुआती स्तर पर करीब 800 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया था, जबकि अब तक परियोजना पर लगभग 2,200 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आ रही है. उनका कहना है कि इतनी बड़ी लागत वृद्धि के कारणों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके.
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आरोपों से जुड़े दस्तावेज SIT को सौंपे
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं, जिनमें विभिन्न निर्माण कार्यों, भुगतान और लागत से संबंधित जानकारियां दर्ज हैं. इन्हीं दस्तावेजों को उन्होंने जांच एजेंसी को सौंपा है. उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.
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हालांकि, इस मामले में संबंधित ट्रस्ट या निर्माण कार्य से जुड़े अधिकारियों की ओर से इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया है, जिसमें लागत वृद्धि को लेकर लगाए गए आरोपों को स्वीकार किया गया हो. ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
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800 करोड़ से 2200 करोड़ कैसे हुए खर्च?
महिपाल सिंह का दावा है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के समय राम मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत 800 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन बाद में परियोजना पर करीब 2200 करोड़ रुपये खर्च किए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि लागत में हुई इस बढ़ोतरी से कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया.
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उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को पहले से गठित विशेष जांच दल (SIT) के अध्यक्ष और लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने उन्हें ई-मेल के जरिए संपर्क कर आरोपों से जुड़े सबूत पेश करने का मौका दिया था. ई-मेल में यह भी कहा गया था कि यदि जांच के दौरान जरूरत महसूस हुई तो उनका बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी दर्ज किया जा सकता है.
महिपाल सिंह इससे पहले 9 जून को भी कई गंभीर आरोप सार्वजनिक रूप से लगा चुके हैं. उनका कहना था कि साल 2021 के दौरान ही उन्होंने मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी का मामला पकड़ लिया था.
महिपाल सिंह ने लगाए गंभीर आरोप
महिपाल सिंह ने एसआईटी को दिए अपने बयान में आरोप लगाया है कि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के संरक्षण में बैंककर्मी रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप कथित तौर पर जरूरत से अधिक नोटों की गड्डियां ले जाकर चढ़ावे की राशि में हेराफेरी करते थे. उनका दावा है कि जब उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को दी तो उन्हें शांत रहने की सलाह दी गई. इसके अगले ही दिन उनकी ड्यूटी हटाकर उनकी जगह सुभाष श्रीवास्तव को तैनात कर दिया गया. महिपाल ने कहा कि वही सुभाष श्रीवास्तव अब पुलिस की गिरफ्त में हैं.
महिपाल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियर जगदीश आफले को प्रोजेक्ट इंजीनियर नियुक्त किया, जबकि उनके पास सिविल इंजीनियरिंग का अनुभव नहीं था. उनके अनुसार, इसी वजह से मंदिर का निर्माण निर्धारित वास्तु मानकों के अनुरूप नहीं हो सका.
उन्होंने दावा किया कि बंशी पहाड़पुर के पत्थर निशुल्क उपलब्ध होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं किया गया और उनकी जगह कथित तौर पर कम गुणवत्ता वाले पत्थरों को खरीदा गया.
महिपाल ने अपने आरोपों में यह भी कहा कि चंपत राय ने महंत शशिकांत दास को लाभ पहुंचाने के लिए ट्रस्ट का कार्यालय राम कचहरी मंदिर में स्थापित कराया, जबकि जगन्नाथ मंदिर, लवकुश मंदिर और रंगमहल मंदिर में बिना किसी शुल्क के स्थान उपलब्ध था.
इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट ने कुछ ऐसे व्यक्तियों से विवादित संपत्तियां खरीदीं, जिन पर उनका वैध कब्जा नहीं था. बाद में इन संपत्तियों को लेकर न्यायालय में मुकदमे दायर हुए, जिससे अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ा.
महिपाल सिंह का यह भी दावा है कि तत्कालीन कैशियर वीरेंद्र वर्मा ने कई ऐसे लोगों के नाम पर भुगतान जारी किया, जिन्होंने कथित तौर पर कोई कार्य ही नहीं किया. इन सभी आरोपों से संबंधित जानकारी उन्होंने विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष प्रस्तुत करने की बात कही है.