सपा प्रमुख अखिलेश यादव 24 सितंबर को रायबरेली से अपनी ‘राजनीतिक यात्रा’ का आगाज करने जा रहे हैं. इस यात्रा को सपा और कांग्रेस के बीच आगामी चुनाव के लिए शुरू होने वाली सीट बंटवारे की बातचीत से जोड़कर देखा जा रहा है. भले ही सपा इसे स्थानीय मुद्दों से जुड़ा कार्यक्रम बता रही हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में राहुल गांधी के क्षेत्र में इतनी बड़ी यात्रा निकालना एक तरह से सपा की स्थानीय ताकत का अहसास कराने की रणनीति मानी जा रही है. अखिलेश यह संदेश देना चाहते हैं कि गांधी परिवार का गढ़ होने के बावजूद रायबरेली में जमीनी स्तर पर सपा का संगठन बेहद मजबूत है.
हालांकि पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह यह दौरा छात्र नेताओं पर हुए दुर्व्यवहार के विरोध में है. सपा की प्रस्तावित प्रदेशव्यापी ‘PDA यात्रा’ का औपचारिक आगाज नहीं है. सपा के मुख्य प्रवक्ता के अनुसार, इस दौरे को मुख्य PDA यात्रा से अलग तौर पर देखा जाना चाहिए.
बछरावां से शुरुआत, राहुल लोधी के घर जाएंगे अखिलेश
तय कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव की राजनीतिक यात्रा रायबरेली के बछरावां से शुरू होगी. इस दौरान वह पार्टी कार्यकर्ता राहुल लोधी के घर भी जाएंगे. रायबरेली की जमीनी सियासत पर नजर डालें तो इस लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली पांच विधानसभा सीटों में से तीन पर मौजूदा समय में समाजवादी पार्टी के विधायक काबिज हैं. सपा का यह मजबूत जनाधार ही अखिलेश के इस फैसले की मुख्य वजह माना जा रहा है.
नेताओं के बयानों में अलग-अलग दावे
दोनों दलों के नेताओं की बयानबाजी ने सियासी हलचल और बढ़ा दी है. एक तरफ कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने दावा किया कि पूरे देश में विपक्ष की इकलौती और सबसे मजबूत आवाज केवल राहुल गांधी हैं. वहीं, सपा सांसद इकरा हसन ने इसके उलट कहा कि भाजपा को हराने में केवल अखिलेश यादव ही पूरी तरह सक्षम हैं. सियासी बयानबाजी उस दिन सामने आई जब BJP अध्यक्ष नितिन नवीन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर संगठन व चुनावी रणनीति को धार दे रहे थे.
इमरान मसूद बोले- राहुल गांधी के बिना कुछ भी संभव नहीं
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पूरे देश में BJP के खिलाफ मजबूत आवाज सिर्फ राहुल गांधी हैं. उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी की मेहनत से ही देश में माहौल बदला है और उनके नेतृत्व के बिना भाजपा से मुकाबला नहीं किया जा सकता.
इकरा हसन का पलटवार- अकेले अखिलेश यादव ही सक्षम
कांग्रेस सांसद के दावे के उलट, कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने अखिलेश यादव पर भरोसा जताया. उन्होंने दो टूक कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने की क्षमता सिर्फ अखिलेश यादव में है और कांग्रेस अपने दम पर राज्य में कुछ खास नहीं कर पाएगी.
2024 में दिखाया था दम, अब सीटों पर पेच
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था. तब गठबंधन ने यूपी की 80 में से 43 सीटें जीतकर मजबूत प्रदर्शन किया था, जिसमें सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटें मिली थीं. गठबंधन ने अयोध्या को समेटने वाली फैजाबाद जैसी प्रतिष्ठित सीट पर भी BJP को हराया था. अब 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही दोनों सहयोगी दलों में नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर खींचतान खुलकर सामने आने लगी है.