कानपुर के रावतपुर इलाके में स्थित आहूजा अस्पताल से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है. यहां इलाज के नाम पर अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का काला खेल बड़े पैमाने पर चल रहा था जिसका भंडाफोड़ होते ही पूरा स्टाफ रातों-रात गायब हो गया. अस्पताल के बाहर तैनात सुरक्षा गार्ड ने सारा सच एक ही लाइन में बयान कर दिया कि पुलिस डॉक्टर दंपति को पकड़ ले गई है और उसके बाद डर के मारे सब भाग निकले. रिसेप्शन पर खुले पड़े रजिस्टर और इमरजेंसी वार्ड में टंगी आधी खाली ड्रिप इस बात की गवाही दे रही हैं कि यहां मानवता को शर्मसार करने वाला धंधा बेखौफ तरीके से फल-फूल रहा था.

लाखों का लालच देकर करोड़ों में किडनी का सौदा

पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि डॉक्टर प्रीति आहूजा और सुरजीत सिंह आहूजा का यह नेटवर्क बेहद शातिर और संगठित तरीके से काम करता था. ये लोग दलालों के जरिए गरीब और मजबूर लोगों को ढूंढते थे और उन्हें चंद लाख रुपयों का लालच देकर उनकी किडनी निकाल लेते थे. एक बेहद चौंकाने वाले मामले में उत्तराखंड के एक युवक को 10 लाख रुपये देने का झांसा देकर उसकी किडनी ली गई लेकिन उसे पूरे पैसे भी नहीं दिए गए. आरोप है कि उसी युवक की किडनी का सौदा एक अमीर महिला मरीज के परिवार से करीब 90 लाख रुपये में किया गया था. पकड़े जाने के डर से ये लोग डोनर और रिसीवर को ऑपरेशन के तुरंत बाद अलग-अलग गुप्त जगहों पर छिपा देते थे.

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छात्रों और गरीबों को जाल में फंसाने वाला खतरनाक नेक्सस

इस पूरे किडनी कांड का मुख्य मोहरा शिवम अग्रवाल नाम का बिचौलिया था जो जरूरतमंद छात्रों और गरीबों को पैसों का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था. जांच में यह डरावना सच भी सामने आया है कि एमबीए के छात्र-छात्राओं तक को चंद रुपयों के बदले इस अवैध धंधे में धकेला गया था. अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में बिना किसी कानूनी अनुमति के ये सर्जरी की जाती थीं और प्रबंधन हर केस के लिए साढ़े तीन से चार लाख रुपये की मोटी फीस वसूलता था. इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश तब हुआ जब पैसों के बंटवारे को लेकर अनबन हुई और एक पीड़ित डोनर ने हिम्मत दिखाकर पुलिस को पूरी आपबीती सुना दी.

क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन और अस्पतालों पर छापेमारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने शहर के कई अस्पतालों में एक साथ छापेमारी की जिसमें आहूजा अस्पताल के अलावा प्रिया और मेडलाइफ हॉस्पिटल भी जांच के दायरे में आ गए हैं. पुलिस ने भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज और मरीजों का डेटा जब्त किया है और डॉक्टर दंपति समेत दलाल शिवम को सलाखों के पीछे भेज दिया है. जांच टीम अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जहां किडनी पाने वाले मरीजों को गुपचुप तरीके से शिफ्ट किया गया था. फिलहाल आहूजा अस्पताल को पूरी तरह सील कर दिया गया है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस मौत के व्यापार के तार देश के और किन बड़े शहरों से जुड़े हुए हैं.