जयपुर में बढ़ते लेपर्ड मूवमेंट पर विधानसभा में हंगामा, सरकार लाएगी 1926 हेल्पलाइन और SOP

राजस्थान विधानसभा में रिहायशी इलाकों में लेपर्ड की एंट्री पर चिंता जताई गई. वन मंत्री संजय शर्मा ने 1926 हेल्पलाइन और जल्द SOP लागू करने का आश्वासन दिया। जयपुर में बढ़ती लेपर्ड घटनाओं पर अलार्म.

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सोचिए… रात के सन्नाटे में मोहल्ले की गली में अचानक लेपर्ड दिख जाए. फोन हाथ में हो, लेकिन सवाल ये- कॉल किसे करें? यही सवाल बुधवार को राजस्थान विधानसभा में गूंजा, जब जयपुर की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा प्रश्नकाल में उठा.
बीजेपी विधायक कालीचरण सराफ ने अपनी ही सरकार से सीधा सवाल किया कि जब रिहायशी इलाकों में लेपर्ड या अन्य वन्य जीव घुस आएं, तो आम आदमी के लिए इमरजेंसी नंबर क्या है? और क्या राजस्थान में भी महाराष्ट्र जैसी तय SOP लागू होगी?

“लेपर्ड आ जाए तो लोग किसे फोन करें?”

जयपुर और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ समय से लेपर्ड मूवमेंट की घटनाएं बढ़ी हैं. सवाल उठाते हुए जयपुर के मालवीय नगर से बीजेपी के विधायक कालीचरण सराफ ने कहा कि फिलहाल प्रदेश में वन्य जीवों की आपात स्थिति के लिए कोई सिंगल हेल्पलाइन और स्पष्ट प्रोटोकॉल नहीं है.
उन्होंने सदन को बताया कि कई मामलों में लेपर्ड की सूचना के बाद 1 से 2 घंटे बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचती है. तब तक इलाके में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है.

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कालीचरण सराफ का सवाल

“जयपुर जैसे बड़े शहर में अगर लेपर्ड रिहायशी इलाके में आ जाए, तो आम आदमी किसे सूचना दे? कोई तय हेल्पलाइन नहीं है, कोई SOP नहीं है. महाराष्ट्र में व्यवस्था है—पूरे इलाके को सील कर तय समय में कार्रवाई होती है. राजस्थान में ऐसा क्यों नहीं?”

सरकार का जवाब: जल्द बनेगी व्यवस्था

विधायक के सवाल पर वन मंत्री संजय शर्मा ने सदन में माना कि प्रदेश में वन्य जीव और आमजन के बीच संघर्ष की स्थिति बन रही है और इस पर व्यवस्थित समाधान जरूरी है.
वन मंत्री ने बताया कि वन्य जीवों से जुड़े मामलों के लिए 1926 हेल्पलाइन पर काम चल रहा है, जिसे एक महीने के भीतर शुरू करने की तैयारी है. इसके जरिए रिहायशी इलाकों में वन्य जीव दिखने पर तुरंत सूचना मिल सकेगी. वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि हम मानते हैं कि वन्य जीव और आमजन के बीच संघर्ष की स्थिति आती है. 1926 हेल्पलाइन को जल्द शुरू किया जा रहा है. साथ ही महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में लागू प्रोटोकॉल का अध्ययन कर, राजस्थान के लिए SOP तैयार की जाएगी.”
मंत्री ने यह भी बताया कि प्रस्तावित SOP को इसी वित्तीय वर्ष में लागू करने का प्रयास किया जाएगा.

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ग्राउंड रियलिटी: दहशत और खतरा

हकीकत ये है कि जयपुर ही नहीं, राजस्थान के कई शहरी इलाकों में लेपर्ड रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुके हैं. इससे न सिर्फ जान-माल का खतरा बढ़ा है, बल्कि लोगों में डर भी गहराया है. हाल ही में जयपुर के सिविल लाइंस इलाके—जहां मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बंगले हैं- वहां तक लेपर्ड की मौजूदगी सामने आ चुकी है. ऐसे में सवाल सिर्फ वन विभाग का नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था का भी है.

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अब नजरें सरकार के अगले कदम पर

विधानसभा में आश्वासन मिल चुका है, लेकिन असली परीक्षा अब जमीन पर होगी , कि क्या 1926 हेल्पलाइन वाकई समय पर शुरू होगी? क्या SOP सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगी या मौके पर असर दिखाएगी? और सबसे अहम—क्या संकट की घड़ी में आम नागरिक को तुरंत मदद मिलेगी? क्योंकि मामला सिर्फ लेपर्ड का नहीं, मामला जयपुर और राजस्थान के शहरी इलाकों में रहने वाले हर परिवार की सुरक्षा का है.

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