जालोर में वोटिंग बढ़ाने के लिए कलेक्टर ने छपवाई पत्रिका, वोट देने के लिए शादी की तरह भेजा जाएगा न्यौता
Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान के जालोर में सबसे कम मतदान होता है। ऐसे में जिला कलेक्टर ने वोटिंग परसेंट बढ़ाने के लिए एक अनूठा प्रयास किया है।
Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान में 25 नवंबर को विधानसभा चुनाव को लेकर मतदान होना है। ऐसे में मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिए जालोर के जिला कलेक्टर ने अनुठी पहल की है। कलेक्टर निशांत जैन ने जालोर जिले से बाहर रहने वाले प्रवासियों को मतदान के लिए प्रेरित करने हेतु कुमकुम पत्रिका डिजाइन की है। इस पत्रिका को डिजिटल तरीके से प्रवासी मतदाताओं तक पहुंचाया जा रहा है ताकि चुनाव में अधिक से अधिक लोग मतदान कर सके। जिस प्रकार विवाह की पत्रिकाएं प्रकाशित करवाई जाती है ठीक उसी तरह से यह पत्रिका डिजाइन की गई है। बता दें कि प्रदेश में पहले 23 नवंबर को मतदान होना था, लेकिन इस दिन प्रदेश में हजारों शादियां हो रही है ऐसे में चुनाव आयोग ने तारीखों में बदलाव किया था।
जालोर जिले से करीब डेढ़ लाख प्रत्याशी बाहर रहते हैं। विशेष दक्षिण भारतीय राज्यों में। इस कारण अक्सर जालौर जिला मतदान प्रतिशत में अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ जाता है। 2013 के विधानसभा चुनाव में 74.3 प्रतिशत मतदान हुआ वहीं 2018 में 75.1 प्रतिशत लोगों ने अपने मत का उपयोग किया। वहीं जालोर की बात करें तो यहां 2018 में मात्र 69.72 फीसदी लोगों ने वोट डाला। इसी के तहत डिजिटल कुमकुम पत्रिका भेजकर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जालोर में विधानसभा की पांच सीटें हैं। यहां रानीवाड़ा और जालोर को छोड़कर शेष तीन विधानसभा आहोर, सांचौर और भीनमाल में कम मतदान हुआ। 2018 में सांचौर में 61.88 प्रतिशत, जालोर में 61. (https://www.topskitchen.com) 39 और भीनमाल में 66.24 फीसदी लोगों ने मतदान किया था। इस कारण जिले का औसत मतदान भी काफी कम रहा। ऐसे में मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस प्रकार की पहल की है।
Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान में 25 नवंबर को विधानसभा चुनाव को लेकर मतदान होना है। ऐसे में मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिए जालोर के जिला कलेक्टर ने अनुठी पहल की है। कलेक्टर निशांत जैन ने जालोर जिले से बाहर रहने वाले प्रवासियों को मतदान के लिए प्रेरित करने हेतु कुमकुम पत्रिका डिजाइन की है। इस पत्रिका को डिजिटल तरीके से प्रवासी मतदाताओं तक पहुंचाया जा रहा है ताकि चुनाव में अधिक से अधिक लोग मतदान कर सके। जिस प्रकार विवाह की पत्रिकाएं प्रकाशित करवाई जाती है ठीक उसी तरह से यह पत्रिका डिजाइन की गई है। बता दें कि प्रदेश में पहले 23 नवंबर को मतदान होना था, लेकिन इस दिन प्रदेश में हजारों शादियां हो रही है ऐसे में चुनाव आयोग ने तारीखों में बदलाव किया था।
जालोर जिले से करीब डेढ़ लाख प्रत्याशी बाहर रहते हैं। विशेष दक्षिण भारतीय राज्यों में। इस कारण अक्सर जालौर जिला मतदान प्रतिशत में अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ जाता है। 2013 के विधानसभा चुनाव में 74.3 प्रतिशत मतदान हुआ वहीं 2018 में 75.1 प्रतिशत लोगों ने अपने मत का उपयोग किया। वहीं जालोर की बात करें तो यहां 2018 में मात्र 69.72 फीसदी लोगों ने वोट डाला। इसी के तहत डिजिटल कुमकुम पत्रिका भेजकर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जालोर में विधानसभा की पांच सीटें हैं। यहां रानीवाड़ा और जालोर को छोड़कर शेष तीन विधानसभा आहोर, सांचौर और भीनमाल में कम मतदान हुआ। 2018 में सांचौर में 61.88 प्रतिशत, जालोर में 61. (https://www.topskitchen.com) 39 और भीनमाल में 66.24 फीसदी लोगों ने मतदान किया था। इस कारण जिले का औसत मतदान भी काफी कम रहा। ऐसे में मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस प्रकार की पहल की है।