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राजस्थान रिफाइनरी में आग पर सियासत तेज, गहलोत ने हादसे को 'हैरान करने वाला' बताया तो सरकार ने कहा- बयानबाजी ठीक नहीं

बाड़मेर रिफाइनरी में उद्घाटन से पहले भीषण आग लगने से सुरक्षा और सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए. 80 हजार करोड़ के इस मेगा प्रोजेक्ट पर सियासत तेज, गहलोत ने मांगी निष्पक्ष जांच.

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राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में बनी मेगा रिफाइनरी… उद्घाटन से ठीक पहले आग की चपेट में आ गई. करीब 80 हजार करोड़ की लागत से तैयार इस प्रोजेक्ट में हादसे ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.जिस यूनिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री पीएम मोदी करने वाले थे. वहीं अचानक लगी भीषण आग ने सुरक्षा और सिस्टम दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है तो वहीं सरकार जांच पूरी होने तक बयानबाजी से बचने की बात कह रही है.

करीब 13 साल की मेहनत… 80 हजार करोड़ रुपये की लागत… और 9 मिलियन मीट्रिक टन सालाना उत्पादन क्षमता…बालोतरा के पचपदरा में बनी इस रिफाइनरी को राजस्थान की अर्थव्यवस्था का गेमचेंजर माना जा रहा था. 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों उद्घाटन की भव्य तैयारियां चल रही थीं…लेकिन उससे ठीक पहले सीडीयू (Crude Distillation Unit) में हाइड्रोकार्बन लीकेज के चलते भीषण आग लग गई. आग की लपटें करीब 100 फीट तक उठीं…करीब 40 फायर ब्रिगेड की मदद से 2 घंटे में आग पर काबू पाया गया…लेकिन शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 3000 करोड़ की यूनिट को भारी नुकसान हुआ है. हैरानी की बात ये है कि यह यूनिट पूरी तरह ऑटोमेटेड थी. वार्निंग सिस्टम भी मौजूद था. लेकिन लीकेज से पहले कोई अलर्ट सामने नहीं आया. अब इस यूनिट को दोबारा चालू करने में 3 से 4 महीने लग सकते हैं. ऐसे में जवाब देही को लेकर इस रिफाइनरी की आधारशिला रखवाने से लेकर इसके निर्माण को पूरा करने तक बड़ी कोशिश करने वाले पूर्व सीएम अशोक गहलोत भी अब इस हादसे पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि नई रिफाइनरी में आग लगने की पिछले 25 सालों में कोई घटना सामने नहीं आई है ऐसे में वे खुद भी इससे हैरान है! चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो.

“तकनीकी चूक या किसी दबाव का नतीजा… इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए… नई रिफाइनरी में ऐसा हादसा कैसे हुआ…”

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इस रिफाइनरी में राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी है…इसके शुरू होने से हर साल 30 से 40 हजार करोड़ रुपये की आय का अनुमान था. साथ ही 25 हजार करोड़ के पेट्रोकेमिकल हब और हजारों रोजगार इस प्रोजेक्ट से जुड़े हैं. अब हादसे के चलते उत्पादन में देरी होगी. पेट्रोकेमिकल कंपलेक्स से जुड़ी डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज प्रभावित होंगी. रोजगार के अवसर भी टलेंगे, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि…पिछले 3 महीनों से लगातार टेस्टिंग के बावजूद यह हादसा कैसे हुआ? पेट्रोलियम मंत्रालय ने अब तक शुरुआती कारण साफ क्यों नहीं किए? और जिम्मेदारी किसकी तय होगी? इसी बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया.

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“जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह की बयानबाजी ठीक नहीं… पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ होगी…”

फिलहाल पीएमओ, पेट्रोलियम मंत्रालय और राज्य सरकार—सभी स्तर पर जांच जारी है. लेकिन यह हादसा अब सिर्फ एक तकनीकी दुर्घटना नहीं…बल्कि सुरक्षा प्रबंधन और जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन गया है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में क्या निकलकर सामने आता है…और क्या इस मेगा प्रोजेक्ट में हुए हादसे पर उठे सवालों के जवाब मिल पाते हैं या नहीं. लेकिन इससे भी हम सवाल कि आखिरकार पहले ही परियोजना में रजनीतिक कारणों की देरी के चलते दुगनी लागत तक पहुंच चुके इस रिफाइनरी का उद्घाटन का मुहूर्त अब कब निकलेगा!

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