राजस्थान में आठवीं जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 2011 के बाद यह जनगणना हो रही है। जबकि इसमें 84 साल बाद जातीय जनगणना के आंकड़े भी मिलेंगे। पहले चरण में मकान की गिनती होगी। दूसरे चरण में उन लोगों की गणना होगी, जो कि प्रदेश में रह रहे हैं। साल 2027 में पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। यानी कागज के पन्नों और रजिस्टर की जगह अब मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल से गिनती होगी। जिसमें लोग खुद जनगणना कर सकेंगे। इसके लिए सेल्फ सेंसेक्स वेब पोर्टल लॉन्च होगा, जिसमें दी गई डीटेल्स बाद में जांच करके वेरीफाई होगी।
डिजिटल जनगणना हो रही है- विष्णु चरण मलिक
निदेशक विष्णु चरण मलिक के मुताबिक, यह जनगणना पहली बार है और जब हम डिजिटल जनगणना करने जा रहे हैं, तो इससे कोई भी व्यक्ति छूटे नहीं। मोबाइल ऐप और स्व-जनगणना सुविधा से यह काम और तेज और सटीक होगा।
जनगणना 2027 दो चरणों में होगी
बता दें, जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण और गणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगी। इसमें हर घर की स्थिति सुविधा संपत्ति शौचालय पानी बिजली फोन वहां इंटरनेट जैसी 30 से भी ज्यादा सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी। जबकि दूसरा चरण जनसंख्या गणना को फरवरी 2027 तक पूरा करके हर व्यक्ति की सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक जानकारी जुटा ली जाएगी। इन सभी आंकड़ों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा। इसके साथ ही गलत जानकारी देने या जानकारी ही नहीं देने वालों पर 1000 जुर्माना और जनगणना काम में लगे कर्मचारी के दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
आखिरी बार जातीय जनगणना कब हुई थी?
दरअसल, 84 साल पहले आखिरी बार जातीय जनगणना 1941 में हुई थी। साल 2011 में जब जनगणना हुई थी, तो राजस्थान में 33 जिले थे। जो कि साल 2025 में बढ़कर 41 हो गए। इसी तरह राजस्थान में 244 तहसीलों से बढ़कर 426, 185 कस्बे से बढ़कर 313 और 44,672 गांव की संख्या बढ़कर 48,068 हो गई है। ऐसी उम्मीद की जा सकते कि जनगणना और जाकर जनगणना के आंकड़े आने के बाद सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाना संभव हो पाएगा।