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Exclusive: 300 साल पुराने चौगान स्टेडियम में खिलाड़ियों के सपने कैद, उद्घाटन का इंतजार करती करोड़ों की खेल सुविधाएं

करीब 300 वर्ष पहले सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा स्थापित चौगान मैदान कभी जयपुर की सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है. आज यहां करीब 15 खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन खिलाड़ियों को बेहतर ट्रैक, पर्याप्त कोच और आधुनिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं.

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देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें ‘खेलो इंडिया’, ‘फिट इंडिया’ और ओलंपिक मिशन जैसे अभियानों पर जोर देती हैं. खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाने के दावे भी किए जाते हैं. लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर का करीब 300 साल पुराना चौगान स्टेडियम इन दावों की जमीनी हकीकत बयां करता नजर आता है. यहां करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई कई खेल सुविधाएं पिछले डेढ़ साल से खिलाड़ियों के बजाय ताले और धूल की कैद में हैं.

वॉशरूम पर लगा ताला


सबसे अधिक परेशानी महिला खिलाड़ियों को झेलनी पड़ रही है. स्टेडियम में लाखों रुपये की लागत से बने वॉशरूम आज तक चालू नहीं हो सके हैं, क्योंकि उनमें पानी का कनेक्शन ही नहीं दिया गया. ऐसे में कई महिला खिलाड़ी घंटों की प्रैक्टिस के दौरान पानी पीने से बचती हैं ताकि उन्हें वॉशरूम जाने की जरूरत न पड़े. खिलाड़ियों और उनके परिजनों का कहना है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कैसे की जा सकती है.

वॉशरूम बंद रखने के पीछे सुरक्षा कारण


स्टेडियम प्रशासन का कहना है कि वॉशरूम बंद रखने के पीछे सुरक्षा कारण हैं. जिला खेल अधिकारी मानसिंह के मुताबिक, शाम के समय असामाजिक तत्व परिसर में पहुंच जाते हैं और बंदर पानी की टंकियों व पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाते हैं. इसी वजह से पहले सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का निर्णय लिया गया है. उनका कहना है कि सुरक्षा इंतजाम पूरे होने के बाद ही वॉशरूम आम उपयोग के लिए खोले जाएंगे.

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स्टेडियम को उद्घाटन का इंतजार


चौगान स्टेडियम में सिर्फ वॉशरूम ही नहीं, बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत तैयार किए गए लॉन टेनिस कोर्ट भी करीब सवा साल से उद्घाटन का इंतजार कर रहे हैं. करोड़ों रुपये की लागत से बने इन कोर्टों पर आज धूल जमी हुई है और खिलाड़ी उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. इसी तरह कबड्डी खिलाड़ियों के लिए खरीदे गए अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैट अब तक पैकिंग में ही रखे हुए हैं, जबकि टेबल टेनिस सहित अन्य खेल सुविधाओं का भी उपयोग शुरू नहीं हो सका है.

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कमरों की स्थिति भी बदहाल


खिलाड़ियों के लिए बनाए गए चेंजिंग रूम और टूर्नामेंट के दौरान ठहरने वाले कमरों की स्थिति भी बदहाल है. बिजली विभाग का करीब सात लाख रुपये का बकाया जमा नहीं होने के कारण बिजली कनेक्शन काट दिया गया. इसके बाद कमरों पर ताले लग गए और अब वहां प्लास्टर झड़ने लगा है. परिसर में रखे जनरेटर, ट्रांसफॉर्मर और अन्य बिजली उपकरण भी लंबे समय से बेकार पड़े हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इन कमरों का उपयोग खिलाड़ियों की बजाय चुनाव के दौरान मतदान केंद्र के रूप में अधिक होता है.

निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं स्टेडियम में लगाए गए सौर ऊर्जा पैनल भी अब तक बिजली उत्पादन से नहीं जुड़ सके हैं. खेल विभाग का कहना है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत हुए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं. विभाग ने आशंका जताई है कि कुछ निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हैं और बिना तकनीकी जांच के उन्हें अपने अधीन लेना जोखिम भरा हो सकता है. इसी कारण सरकार से जांच समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है. अधिकारियों के अनुसार, इसी प्रक्रिया में एक से डेढ़ साल का समय बीत गया, लेकिन अब तक अंतिम फैसला नहीं हो पाया है.

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300 साल पहले हुई थी चौगान मैदान की स्थापना


करीब 300 वर्ष पहले सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा स्थापित चौगान मैदान कभी जयपुर की सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है. आज यहां करीब 15 खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन खिलाड़ियों को बेहतर ट्रैक, पर्याप्त कोच और आधुनिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्विमिंग पूल उद्घाटन का इंतजार कर रहा है और कई खेल संसाधन उपयोग से पहले ही जर्जर होने लगे हैं.

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ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं तक समय पर उपलब्ध नहीं होंगी, तो देश के लिए मेडल जीतने की उम्मीद कैसे पूरी होगी. चौगान स्टेडियम की यह तस्वीर सिर्फ एक खेल परिसर की बदहाली नहीं, बल्कि खेल व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों की ओर भी इशारा करती है.

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