राजस्थान सरकार ने ग्रामीण इलाकों में गायों की सुरक्षा और देखभाल के लिए एक नई पहल शुरू की है. इस योजना का नाम ‘गांव ग्वाला योजना’ रखा गया है, जिसके तहत गांवों में ऐसे लोगों को ग्वाला नियुक्त किया जाएगा, जो रोजाना गांव की गायों को चराने और सुरक्षित वापस लाने का काम करेंगे. इस योजना की शुरुआत कोटा जिले के रामगंजमंडी इलाके के खेड़ली गांव से की गई है. पहले चरण में करीब 14 गांवों में ग्वालों की नियुक्ति की गई है. इन ग्वालों को गांव की सभी गायों को एक साथ चारा खिलाने के लिए बाहर ले जाना होगा, दिनभर चराना होगा और शाम को सुरक्षित वापस लाना होगा.
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मदन दिलावर ने की योजना की शुरुआत
राज्य के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने इस योजना की शुरुआत की. इस दौरान मंत्री मदन दिलावर ने मंच पर 14 नवनियुक्त गांव ग्वालों का साफा और माला पहनाकर सम्मान किया. योजना की शुरुआत करते हुए कहा कि पहले गांवों में ग्वाला प्रथा आम थी, लेकिन समय के साथ ये परंपरा खत्म होती चली गई. अब इस योजना के जरिए उस परंपरा को फिर से जीवित किया जा रहा है. योजना के नियमों के मुताबिक, करीब 70 गायों पर एक ग्वाला नियुक्त किया जाएगा. अगर किसी गांव में गायों की संख्या ज्यादा है, तो वहां एक से ज्यादा ग्वाले भी रखे जा सकते हैं. हर ग्वाले को हर महीने 10 हजार रुपये दिए जाएंगे.
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'गाय का दूध बच्चों के लिए जरूरी'
खास बात ये है कि ये पैसे सीधे सरकारी खजाने से नहीं दिया जाएगा, बल्कि भामाशाहों और दानदाताओं के सहयोग से इकट्ठा की गई राशि से दिया जाएगा. सरकार इस योजना में गांव के लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित करना चाहती है. मंत्री मदन दिलावर ने इस दौरान कहा कि गायों की सही देखभाल से ना सिर्फ पशुधन सुरक्षित रहेगा, बल्कि गांवों की सामाजिक व्यवस्था भी मजबूत होगी. उन्होंने ये भी कहा कि गाय का दूध बच्चों के स्वास्थ्य और विकास के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन जो बच्चे भैंस का दूध पीते हैं वो काफी सुस्त हो जाते हैं. इसीलिए बच्चों को ज्यादा से ज्यादा गाय का दूध मिलना जरूरी है.
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