पंजाब की राजनीति के इतिहास में दिसंबर 2024 का वह दिन बेहद सनसनीखेज साबित हुआ था, जब अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल के मुख्य द्वार पर शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर जानलेवा हमला किया गया था. 2007 से 2017 के दौरान अकाली सरकार के कार्यकाल में हुई भूलों के लिए श्री अकाल तख्त साहिब ने सुखबीर सिंह बादल को 'तनखाहिया' घोषित किया था. इस धार्मिक सजा के तहत सुखबीर बादल गले में तख्ती लटकाए और हाथ में भाला लिए गोल्डन टेंपल के प्रवेश द्वार पर सेवादार के रूप में पहरा दे रहे थे. वह आम श्रद्धालुओं की तरह अपनी सेवा निभा रहे थे.
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अचानक चली गोली और मच गई अफरा-तफरी
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार अचानक भीड़ में से एक व्यक्ति आगे बढ़ा और उसने सीधे सुखबीर सिंह बादल को निशाना बनाकर पिस्टल से गोली चला दी. गोली की आवाज सुनते ही परिसर में अफरा-तफरी मच गई. हालांकि, मौके पर मुस्तैद सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने अभूतपूर्व फुर्ती दिखाई.
जैसे ही हमलावर ने ट्रिगर दबाया, एक पुलिसकर्मी ने तुरंत उसका हाथ ऊपर की ओर मोड़ दिया. इस वजह से गोली सुखबीर बादल को न लगकर पास की दीवार में जा धंसी और अकाली दल प्रमुख की जान बाल-बाल बच गई.
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हमलावर तुरंत दबोचा गया
गोली चलते ही वहां मौजूद श्रद्धालुओं और सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर को मौके पर ही दबोच लिया. आरोपी की पहचान नारायण सिंह चौरा के रूप में हुई थी, जिसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा था. पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में लेकर हथियार जब्त कर लिया था. इस घटना ने पूरे पंजाब की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. सभी राजनीतिक दलों ने पवित्र धार्मिक स्थल पर हुई इस हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की थी. इस घटना को पंजाब के राजनीतिक इतिहास की सबसे संवेदनशील घटनाओं में से एक माना जाता है.
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