पंजाब कांग्रेस में आजकल बगावत चल रही है और अंदरुनी कलह खुलकर सामने आ गई है। 1 जुलाई 2026 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के द्वारा आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नई टीम की घोषणा की गई थी, जिससे कई दिग्गज नेता नाराज हो गए हैं। उन्होंने कांग्रेस की पंजाब में नई टीम का विरोध किया और अनदेखी का आरोप लगाया। विरोध जताने वाले नेताओं में चरणजीत सिंह चन्नी और मनीष तिवारी शामिल हैं, जो सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं। वहीं अंदरखाते कई नेता दबी आवाज में विरोध कर रहे हैं।
राजा वड़िंग का अध्यक्ष पद बरकरार रखा
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पंजाब की नई टीम का पुनर्गठन किया गया, जिसमें अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी बरकरार रखी गई। वहीं प्रताप सिंह बाजवा को भी नेता प्रतिपक्ष का पद ही दिया गया। चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन, सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी का अध्यक्ष और विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति का प्रमुख बनाया गया। लेकिन चन्नी प्रदेश अध्यक्ष का पद नहीं मिलने से नाराज हैं। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मिलकर कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है।
चन्नी ने समर्थक जुटाकर शक्ति प्रदर्शन किया
दरअसल, चन्नी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के दावेदार थे और वे यह पद चाहते भी थे। चन्नी के समर्थकों को उम्मीद थी कि पंजाब कांग्रेस के संगठन में फेरबदल करके चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया जाएगा। लेकिन उन्हें चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया, जिससे वे संतुष्ट नहीं हैं। हाईकमान के फैसले के विरोध करते हुए चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने मोरिंडा स्थित आवास पर अपने समर्थक नेताओं, पूर्व मंत्रियों और विधायकों की बैठक बुलाई। बैठक में राजा वड़िंग को हटाने और चन्नी को कमान सौंपने या मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की मांग रखी गई।
चन्नी के समर्थकों का हाईकमान को अल्टीमेटम
सूत्रों के अनुसार, चन्नी के घर बैठक में मौजूदा 3 विधायक, 25 के करीब पूर्व विधायक, पूर्व कैबिनेट मंत्री और पूर्व सांसद पहुंचे। पूर्व उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी, पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशू, गुरकीरत कोटली के अलावा पूर्व MLA गुरप्रीत कांगड़ समेत कई नेता बैठक में पहुंचे। बैठक में चन्नी के समर्थकों अध्यक्ष पद की कुर्सी के लिए उनका समर्थन किया। चन्नी समर्थकों ने एक विशेष कमेटी गठित की है, जो दिल्ली जाकर पार्टी हाईकमान और राहुल गांधी से मिलकर राजा वड़िंग को अध्यक्ष बनाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करेगी। उन्होंने हाईकमान को 7 दिन का समय दिया है।
चन्नी क्यों चाहते हैं पंजाब प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी?
दरअसल चन्नी पंजाब के मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं, इसलिए उन्हें प्रदेश अध्यख की कुर्सी चाहिए, ताकि उनके नेतृत्व में पंजाब विधानसभा चुनाव कांग्रेस जीते और उनके मुख्यमंत्री बनने के चांस बने।
चन्नी के अलावा चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी भी पंजाब प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते हैं। लेकिन इस बार उन्हें चुनाव में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई, जिस वजह से वे नाराज हैं और सोशल मीडिया पर नाराजगी जता चुके हैं।
इनके अलावा एक और नेता चुनाव कोर कमेटी के अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह रंधावा सुर्खियों में हैं। क्योंकि वे हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले हैं। हालांकि रंधावा ने दल-बदल की खबरों को अफवाह बताया, लेकिन सियासी गलियारों में उन्हें लेकर अटकलों का दौर जारी है।
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