महाराष्ट्र के मुंबई शहर और आस-पास के इलाकों में बारिश के चलते बदहाल सड़कें लोगों की परेशानी का सबब बनती हैं, लेकिन भिवंडी में इन्हीं गड्ढों ने एक गर्भवती महिला को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. अस्पताल तक पहुंचने से पहले ही प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई और चलती ऑटो रिक्शा में ही महिला ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दे दिया. राहत की बात यह रही कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने भिवंडी की जर्जर सड़कों और प्रशासन के दावों पर फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
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10 मिनट के रास्ते पर लगे 45 मिनट
घटना भिवंडी के अजमेर नगर की रहने वाली वर्षा यादव के साथ हुई. प्रसव पीड़ा शुरू होते ही परिजन उन्हें ऑटो रिक्शा से भिवंडी उपजिला अस्पताल लेकर निकले. सामान्य दिनों में महज पांच से दस मिनट में तय होने वाला रास्ता इस बार गड्ढों, जलभराव और ट्रैफिक के कारण मानो थम-सा गया. सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण ऑटो बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा और अस्पताल पहुंचने में करीब 40 से 45 मिनट लग गए. इसी दौरान प्रसव पीड़ा लगातार बढ़ती गई. आखिरकार कल्याण नाका इलाके में अस्पताल पहुंचने से पहले ही ऑटो रिक्शा नवजात की पहली किलकारी से गूंज उठा.
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पूरे शहर की सड़कें बारिश से बदहाल
परिजनों और राहगीरों ने तत्काल मदद की, जिसके बाद मां और बच्चे को भिवंडी उपजिला अस्पताल पहुंचाया गया. डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की हालत पूरी तरह स्थिर है और किसी तरह का खतरा नहीं है. घटना के प्रत्यक्षदर्शी और महिला के रिश्तेदार संजय कृष्ण कुमार यादव कहते हैं कि यह सिर्फ उनके परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि पूरे शहर की बदहाल सड़कों की कहानी है.संजय कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि प्रसव पीड़ा शुरू होते ही हम तुरंत अस्पताल के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में बड़े-बड़े गड्ढों और ट्रैफिक की वजह से समय पर नहीं पहुंच सके. रास्ते में ही रिक्शा में बच्चे का जन्म हो गया.
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हरसाल मानसून सीजन में होता यही हाल
भगवान की कृपा से मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं. हमारी प्रशासन से अपील है कि भिवंडी की सड़कों की जल्द मरम्मत कराई जाए, ताकि किसी और परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े. यह पहली बार नहीं है जब भिवंडी की बदहाल सड़कें चर्चा में आई हों. हर बरसात में शहर की सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं. लोग घंटों ट्रैफिक जाम में फंसते हैं, दोपहिया वाहन चालक हादसों का शिकार होते हैं और एम्बुलेंस तक समय पर मरीजों को अस्पताल नहीं पहुंचा पाती. अब अस्पताल पहुंचने से पहले ऑटो रिक्शा में प्रसव की इस घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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गड्ढों की मरम्मत कराने की लोगों की अीपल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सड़कों की मरम्मत कर दी जाती, तो शायद इस परिवार को ऐसी जोखिम भरी परिस्थिति से नहीं गुजरना पड़ता. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश खत्म होने का इंतजार करने के बजाय तत्काल गड्ढों की मरम्मत कर भिवंडी की सड़कों को सुरक्षित बनाया जाए, ताकि अगली बार किसी मां को सड़क पर नहीं, बल्कि अस्पताल के प्रसव कक्ष में अपने बच्चे को जन्म देने का अवसर मिले.