Mumbai Car-Free Friday: मुंबई का बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) जो देश के सबसे व्यस्त और जाम से जूझने वाले बिजनेस हब में से एक है, वहां एक अनोखी मुहिम की शुरुआत की गई है. अथॉरिटीज ने देश के किसी भी कॉर्पोरेट डिस्ट्रिक्ट के लिए अपनी तरह की पहली पहल करते हुए 'कार-फ्री फ्राइडे' यानी कार मुक्त शुक्रवार को लॉन्च किया है. इस मुहिम के तहत बीकेसी में काम करने वाले करीब दो लाख प्रोफेशनल्स से हर शुक्रवार को कार चलाने या कैब बुक करने के बजाय ट्रेन, मेट्रो या बस का इस्तेमाल करने की पुरजोर अपील की जा रही है. मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) इस मुहिम को आगे बढ़ा रहा है, जिसमें बेस्ट (BEST), मुंबई मेट्रो, ट्रैफिक पुलिस और ऑटो यूनियंस भी मिलकर काम कर रहे हैं.
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'कार-फ्री फ्राइडे' के पीछे की वजह क्या है?
इस खास मुहिम के लिए शुक्रवार का दिन बिना किसी वजह के नहीं चुना गया है. एमएमआरडीए के अधिकारियों के मुताबिक हफ्ते के आखिरी दिन कॉर्पोरेट शेड्यूल थोड़ा लचीला होता है. इस दिन कर्मचारियों पर समय से ऑफिस पहुँचने का दबाव थोड़ा कम होता है, मीटिंग्स कम होती हैं और सुबह ठीक 9 बजे डेस्क पर रहने की टेंशन नहीं होती है. इसके विपरीत सोमवार के दिन को इस लिस्ट से पूरी तरह बाहर रखा गया था, क्योंकि नए हफ्ते की शुरुआत में कड़े डेडलाइन्स, बैक-टू-बैक मीटिंग्स और काम के दबाव के कारण कोई भी कर्मचारी पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं उठाना चाहता है.
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आखिरी किलोमीटर का सफर बना सिरदर्द
बीकेसी और उसके आसपास पब्लिक ट्रांसपोर्ट का एक मजबूत नेटवर्क पहले से मौजूद है, जिसकी जानकारी कई यात्रियों को नहीं है. मेट्रो लाइन 3 की एक्वा लाइन सीधे बीकेसी को जोड़ती है, जबकि बांद्रा और कुर्ला रेलवे स्टेशन भी फीडर सेवाओं से जुड़े हैं. बेस्ट (BEST) रोजाना इस रूट पर 100 से ज्यादा बसें चलाता है, जिससे रोजाना 25 से 30 हजार लोग सफर करते हैं. इसके बावजूद सबसे बड़ी चुनौती 'लास्ट माइल' यानी स्टेशन से ऑफिस तक के आखिरी एक-दो किलोमीटर के सफर की है. एक टॉप फाइनेंशियल फर्म के अधिकारी के मुताबिक मेट्रो का सफर तो बहुत आसान है, लेकिन स्टेशन से बाहर निकलकर ऑफिस ब्लॉक तक के लिए शेयरिंग ऑटो या फीडर बस ढूंढना किसी बुरे सपने जैसा है.
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सुधार के लिए बना बड़ा प्लान
आंकड़ों के मुताबिक मेट्रो लाइन 3 के चालू होने के बाद भी बीकेसी के 52 फीसदी कर्मचारी रोजाना के सफर के लिए अपनी गाड़ियों, टैक्सियों या ऑटो पर ही निर्भर हैं. सिर्फ 25 फीसदी लोग ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं, जिसके कारण आधे से ज्यादा वर्कफोर्स को हर दिन सफर में दो घंटे से ज्यादा का समय गंवाना पड़ता है. इस समस्या को दूर करने के लिए अथॉरिटीज अब बसों के फेरे बढ़ाने, जंक्शंस पर समर्पित यू-टर्न लेन बनाने और फुटपाथों को बेहतर करने के लिए वहां छायादार ग्रीन कैनोपी और मिस्ट ब्लोअर लगाने की योजना पर काम कर रही हैं. कंपनियों से भी अपील की जा रही है कि वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों को रिवॉर्ड्स और इंसेंटिव्स दें.
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