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डॉक्टर से मारपीट मामले में बड़ा फैसला! हाईकोर्ट से पार्षद रमेश म्हात्रे को जमानत, लेकिन महाराष्ट्र छोड़ने का आदेश

कोर्ट में केडीएमसी के वकील ने आश्वासन दिया कि अगर सुनवाई के लिए डॉक्टरों को अदालत में उपस्थित होना पड़े और वे उस दौरान ड्यूटी पर नहीं जा सकें, तो उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने डोंबिवली के चर्चित डॉक्टर मारपीट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी नगरसेवक रमेश म्हात्रे समेत सभी आरोपियों को जमानत दे दी है. हालांकि कोर्ट ने जमानत के साथ सख्त शर्तें भी लगाई हैं. सबसे अहम शर्त यह है कि रमेश म्हात्रे को अगले आदेश तक महाराष्ट्र से बाहर रहना होगा. कोर्ट के निर्देश के अनुसार, रमेश म्हात्रे और अन्य सभी आरोपियों को जिस राज्य में वे रहेंगे, वहां के स्थानीय पुलिस थाने में सप्ताह में तीन बार हाजिरी लगानी होगी. इसके अलावा सभी आरोपियों को अपने पासपोर्ट भी कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया गया है. मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाएगी.

महाराष्ट्र से बाहर कहां रहेंगे रमेश म्हात्रे?


जमानत मिलने के बाद रमेश म्हात्रे आरोपपत्र दाखिल होने तक गोवा में रहेंगे. उनके वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उनका ठिकाना गोवा के अंजुना पुलिस थाना क्षेत्र में स्थित नाज़री रिज़ॉर्ट होगा. महाराष्ट्र से बाहर रहने की शर्त के चलते कोर्ट को उनके ठहरने की पूरी जानकारी दी गई. मुंबई हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से एक भी दिन सुनवाई टालने की मांग नहीं की जानी चाहिए. अदालत ने मामले का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने पर जोर दिया.

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में होंगे पेश


सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने मांग की कि रमेश म्हात्रे और अन्य आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होने की अनुमति दी जाए. इस पर हाईकोर्ट ने सवाल किया कि क्या यह वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं होगा? हालांकि अदालत ने कहा कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हो सकता, तो वह विधिवत आवेदन देकर किसी एक अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति मांग सकता है.

नहीं बदला जाएगा सरकारी वकील


हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मुकदमा पूरा होने तक सरकारी वकील को नहीं बदला जाएगा. इस मामले के पीड़ित डॉक्टर कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) में कार्यरत हैं. कोर्ट में केडीएमसी के वकील ने आश्वासन दिया कि अगर सुनवाई के लिए डॉक्टरों को अदालत में उपस्थित होना पड़े और वे उस दौरान ड्यूटी पर नहीं जा सकें, तो उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.

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