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‘पहले अपने बच्चों को खिलाएं', पान मसाला एड को लेकर बॉलीवुड सेलेब्स पर भड़के FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे

पान मसाला और गुटखा विज्ञापनों को लेकर महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने बॉलीवुड सितारों को चुनौती देते हुए कहा कि विज्ञापन करने से पहले वे इसे खुद और अपने बच्चों को खिलाकर आदत डालें. एफडीए ने इन सितारों को सरोगेट विज्ञापन के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

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पान मसाला और गुटखा विज्ञापनों को लेकर महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने बॉलीवुड सितारों को दी चुनौती. Credit: ANI

पान मसाला और गुटखा उत्पादों के विज्ञापनों को लेकर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कड़ा रुख अपना लिया है. एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने पान मसाला का प्रचार करने वाले बॉलीवुड सितारों पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने फिल्मी सितारों को दोहरे मापदंड छोड़ने की नसीहत देते हुए सीधी चुनौती दी कि वे पहले इन चीजों को खुद खाएं और अपने बच्चों को खिलाएं, फिर जनता को बताएं. एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए तुकाराम मुंढे ने कहा, “अगर आप पान या गुटखा का विज्ञापन कर रहे हैं तो पहले इसका सेवन खुद करें. अपने बच्चों को इसे खाने दें और उनकी आदत बनवाएं. उसके बाद बाकी दुनिया से ऐसा करने को कहें. यह उल्टा कैसे हो सकता है?”

यह भी पढ़ें : कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे? 21 साल में 25 ट्रांसफर, अब FDA में ‘रियल लाइफ सिंघम’ की कार्रवाई

निजी जीवन और पेशेवर जिंदगी के लिए अलग-अलग नियम नहीं

मुंढे ने कहा कि निजी जीवन और पेशेवर जिंदगी के लिए अलग-अलग नियम नहीं हो सकते. उन्होंने कहा, “मुझे दोगलापन और चापलूसी बिल्कुल पसंद नहीं है. किसी भी स्थिति में दोहरे चेहरे और अलग-अलग पैमाने सही नहीं हैं.” यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र एफडीए ने अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है. एफडीए का मानना है कि यह प्रतिबंधित पान मसाला और तंबाकू उत्पादों का सरोगेट यानी परोक्ष रूप से किया जाने वाला प्रचार हो सकता है. महाराष्ट्र में पान मसाला पूरी तरह प्रतिबंधित है.

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एफडीए कमिश्नर ने उस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जाता है कि कलाकार केवल विज्ञापन का चेहरा होते हैं और उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती. मुंढे ने कहा कि कोई यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकता कि जिम्मेदारी सिर्फ निर्माता की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी ब्रांड को अपना चेहरा देने का मतलब केवल कमाई नहीं है, बल्कि कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी भी है कि वे जनता को क्या खरीदने और खाने के लिए कह रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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