महाराष्ट्र के ठाणे जिले के दिवा इलाके में एक कथित फर्जी डॉक्टर की लापरवाही ने 12 साल के एक मासूम की जान ले ली। इस दर्दनाक घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। मृतक बच्चे की पहचान देवेंद्र सिंह के रूप में हुई है। आरोप है कि गलत उपचार और संदिग्ध दवा देने के कारण उसकी मौत हुई। मामले में मुंब्रा पुलिस ने आरोपी शिशिर राय उर्फ ‘बंगाली बाबा’ के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
दवा देते ही बच्चे की तबीयत बिगड़ी
दिवा के श्लोक नगर क्षेत्र में रहने वाला देवेंद्र सिंह बीमार होने पर परिजन उसे शिशिर राय के पास लेकर गए थे। स्थानीय लोगों के बीच ‘बंगाली बाबा’ के नाम से पहचान रखने वाले शिशिर राय ने बच्चे को एक दवा दी और उसका उपचार शुरू किया। आरोप है कि दवा देने के कुछ ही मिनटों बाद देवेंद्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई। घबराए परिजन उसे तत्काल डोंबिवली के एक अस्पताल ले गए। हालत गंभीर होने पर उसे मुंबई के केईएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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बच्चे की मौत से परिजन आक्रोशित
करीब 7 दिन जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 1 जून को देवेंद्र ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। आरोप है कि जिस व्यक्ति को लोग डॉक्टर समझकर अपना इलाज करा रहे थे, उसके पास चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी कोई वैध योग्यता या अनुमति नहीं थी। चौंकाने वाला पहलू यह है कि शिशिर राय कथित तौर पर श्लोक नगर स्थित शिंदे गुट के कार्यालय में बैठकर मरीजों का इलाज कर रहा था।
स्वास्थ्य विभाग ने क्लिनिक खंगाला
अस्थायी क्लिनिक बना रखा था और लोगों को दवाइयां तथा इंजेक्शन देता था। घटना की गंभीरता को देखते हुए ठाणे महानगर पालिका के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान इंजेक्शन की सुइयां, नीडल, ड्रेसिंग सामग्री, दवाइयों के खाली बॉक्स, कुर्सियां और अन्य चिकित्सकीय सामान बरामद किया गया। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि देवेंद्र को सलाईन चढ़ाई गई थी। स्वास्थ्य विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि कहीं इसी उपचार के कारण उसकी हालत तो नहीं बिगड़ी।
विवाद बढ़ने पर आरोपी फरार हुआ
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने बच्चे को कौन-सी दवा दी थी, वह दवा कहां से खरीदी गई थी और उसके पास चिकित्सा व्यवसाय करने के लिए आवश्यक डिग्री, पंजीकरण या लाइसेंस था या नहीं। मासूम की मौत के बाद आरोपी फरार हो गया है। वहीं स्थानीय नागरिकों ने दिवा क्षेत्र में सक्रिय फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर अवैध रूप से चल रहे क्लिनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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