दामाद के स्वागत के लिए लाई गई 5 ग्राम की सोने की अंगूठी ने ली बेजुबान की जान

Cat Swallows Gold Ring: मराठवाड़ा के बीड जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां दामाद के स्वागत के लिए लाई गई 5 ग्राम की सोने की अंगूठी बिल्ली के पेट में चली गई. चार दिनों के लंबे इंतजार और डॉक्टरों की कोशिशों के बाद सोना तो वापस मिल गया, लेकिन इस पूरी घटना में एक मासूम बेजुबान की जान चली गई. इस अनोखे और दर्दनाक हादसे ने शादी-ब्याह के खुशनुमा माहौल को मातम में बदल दिया है. पढ़ें बीड़ से संजीब रॉय की रिपोर्ट

Beed News, Cat Swallows Gold Ring, Adhik Maas Tradition, Maharashtra News

Cat Swallows Gold Ring: कहते हैं कि किस्मत का लिखा कोई नहीं बदल सकता. लेकिन बीड जिले के एक गांव में किस्मत ने ऐसा खेल खेला कि दामाद के स्वागत के लिए खरीदी गई सोने की अंगूठी दामाद की उंगली में सजने के बजाय एक बिल्ली के पेट में जा पहुंची. अंगूठी तो आखिरकार मिल गई, लेकिन उसकी तलाश में एक बेजुबान की जिंदगी हमेशा के लिए बुझ गई.

विज्ञापन

महाराष्ट्र में इन दिनों चल रहे अधिकमास का माहौल है. यह महीना बेटियों और दामादों के सम्मान और सत्कार के लिए विशेष माना जाता है. बीड जिले के टाकरवन क्षेत्र के एक परिवार में भी बेटी-दामाद के आगमन की तैयारियां पूरे शबाब पर थीं. घर में उत्सव का माहौल था, रसोई से पकवानों की खुशबू उठ रही थी और दामाद के स्वागत के लिए खास तौर पर पांच ग्राम की सोने की अंगूठी बनवाई गई थी.

विज्ञापन

परिवार ने परंपरा के अनुसार अंगूठी को आटे से बने एक विशेष गोले में छिपाकर रखा था. योजना यह थी कि भोजन के दौरान यह सरप्राइज दामाद को दिया जाएगा. लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था.
घर के लोग मेहमाननवाजी में व्यस्त थे कि तभी एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे परिवार के होश उड़ा दिए. घर में घूम रही पालतू बिल्ली ने झटके से वह आटे का गोला निगल लिया, जिसके भीतर सोने की अंगूठी छिपी हुई थी. कुछ पल के लिए किसी को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है. जब सच्चाई सामने आई तो खुशी से झूम रहा घर सन्नाटे में डूब गया.

दामाद के लिए खरीदी गई सोने की अंगूठी अब बिल्ली के पेट में कैद हो चुकी थी.
घरवालों ने बिल्ली पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी. उम्मीद थी कि एक-दो दिन में अंगूठी स्वाभाविक रूप से बाहर निकल आएगी. लेकिन दिन बीतते गए और इंतजार लंबा होता गया. उधर दामाद का सम्मान समारोह भी फीका पड़ गया. अंगूठी की जगह कपड़े भेंट कर रस्म पूरी करनी पड़ी.

विज्ञापन

एक तरफ परिवार को सोने की अंगूठी की चिंता थी, तो दूसरी तरफ बिल्ली की हालत भी बिगड़ने लगी. चार दिनों तक चले इंतजार के बाद आखिरकार उसे पशु चिकित्सक के पास ले जाया गया. डॉक्टरों ने तमाम कोशिशें कीं, दवाइयां दीं, लेकिन किस्मत को शायद यह मंजूर नहीं था.
इलाज के दौरान बिल्ली ने दम तोड़ दिया.

जिस अंगूठी को पाने के लिए पूरा परिवार चार दिनों से बेचैन था, वह आखिरकार मृत बिल्ली के पेट से निकाल ली गई. सोना वापस मिल गया, लेकिन उसके साथ घर में एक गहरा सन्नाटा भी लौट आया.

विज्ञापन

आज टाकरवन और आसपास के गांवों में इस अनोखी घटना की चर्चा हर चौपाल, हर दुकान और हर गली में सुनाई दे रही है. लोग हैरान हैं कि एक छोटी-सी अंगूठी ने कैसे खुशियों से भरे एक समारोह को दर्द भरी दास्तान में बदल दिया.

विडंबना देखिए… जिस सोने की अंगूठी को दामाद की उंगली की शोभा बनना था, वह चार दिन तक एक बिल्ली के पेट में कैद रही. अंगूठी तो आखिरकार मिल गई, लेकिन उसकी चमक के पीछे एक मासूम जिंदगी हमेशा के लिए बुझ गई.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ