Maharashtra Assembly Election 2024: महाराष्ट्र में इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव विभाग अगले कुछ दिनों में तारीखों का ऐलान कर सकता है। इस बीच महाअघाड़ी और महायुति लगातार सीट शेयरिंग को बैठक कर रहे हैं। महायुति के अजित पवार के बयान से महाराष्ट्र की सियासत में खलबली मच गई है। उन्होंने कहा कि हमारे हिस्से में आने वाले सीटों की 10 प्रतिशत सीटें हम अल्पसंख्यक समाज को देंगे।
अजित पवार ने कहा कि मैं सभी धर्म और जातियों को मानने वाला व्यक्ति हूं। उन्होंने कहा कि कुछ सीटों पर धनुष बाण का निशान होगा तो कुछ पर कमल और कुछ पर घड़ी होगी। महायुति में चुनाव के ये 3 ही निशान हैं। हम सभी ने अभी सीटों का बंटवारा नहीं किया है, लेकिन वो होगा तो हमारा विधायक ही। जहां हमारा विधायक है वहां से हम ही चुनाव लड़ेंगे। आप चिंता न करें।
युवा वर्ग को हम विश्वास में लेंगे
एनसीपी प्रमुख ने कहा कि जिन लोगों ने हजारों वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया उन्हें विश्वास में लिया जाएगा। युवा वर्ग को हम विश्वास में लेंगे। बाबा साहेब का संविधान सभी के लिए एक समान है। मैं सभी जाति और धर्म को मानने वाला हूं। उनके इस बयान पर विपक्षी दलों ने भी निशाना साधा है। सपा नेता अबू काजमी ने कहा कि यह उनका असली चेहरा है या नकली चेहरा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम उनको वोट नहीं देगा क्योंकि वे बीजेपी के साथ हैं।
विपक्ष ने साधा निशाना
वहीं एनसीपी शरद पवार के जितेंद्र आव्हाण ने कहा कि वे लोग भूल गए है कि वो आजकल किसके साथ खड़े हैं। उनका साथी कौन है ये सभी को मालूम है। बीजेपी के साथ रहने से सेक्यूलर लोग अजित पवार के साथ नहीं खड़े होंगे।
अजित पवार पिछले साल अपने समर्थक विधायकों के साथ सरकार में शामिल हो गए थे। इतना ही नहीं उन्होंने अधिकतर विधायकों के साथ होने से पार्टी पर भी दावा ठोंक दिया। ऐसे में पार्टी पर भी उनका अधिकार स्थापित हो गया। ऐसे में वेे अब अल्पसंख्यकों वोटर्स को अपनी ओर करने के लिए यह ऐलान कर रहे हैं। आइये जानते हैं उनके बयान के सियासी मायने।
1.अजित पवार लोकसभा चुनाव से पहले शिंदे बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार में शामिल हुए। इससे जनता के मन में उनके प्रति जबरदस्त नाराजगी थी क्योंकि उन्होंने चाचा शरद पवार की पार्टी को तोड़ दिया था।
2.लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली। जबकि उनके चाचा शरद पवार की पार्टी ने 10 में 8 सीटों पर जीत दर्ज की। यानि सहानुभूति लहर का फायदा शरद पवार को मिला।
3.सहानुभूति फैक्टर का साथ मिलने से पार्टी का काडर वोट घड़ी के बजाय शरद पवार के साथ चला गया।
4.पार्टी का मूल वोटर्स मुस्लिम और मराठा है। उनमें भी अधिकांश किसान एनसीपी को सपोर्ट करता था, लेकिन अजित को लगा कि मुस्लिमों ने इस चुनाव में चाचा शरद को वोट दिया, इसलिए उन्होंने 10 प्रतिशत सीटें देने का दांव चला है।
ये भी पढ़ेंः सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन को सुप्रीम कोर्ट से राहत, मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर लगी रोक
5.हालांकि अजित पवार ये बात भी जानते हैं कि सरकार में बीजेपी के साथ रहने से मुस्लिम वोटर्स का झुकाव चाचा की तरह चला जाएगा। ऐसे में अजित इसको लेकर अभी भी आशंकित हैं।
संबंधित खबरें
मुंबई एयरपोर्ट T1 के कायाकल्प के लिए बनी सहमति, बढ़ेगी 33 फीसदी क्षमता
14 hrs agoएयर इंडिया ग्रुप का बड़ा ऐलान, नवी मुंबई एयरपोर्ट पर शिफ्ट होंगी उड़ानें
15 hrs agoबड़ा ऐलान: नवी मुंबई एयरपोर्ट से शुरू होंगी इंडिगो की इंटरनेशनल उड़ानें
15 hrs agoदिल्ली से भी जहरीली हुई मुंबई की हवा, जानें प्रदूषण बढ़ने की वजह
1 day agoरैपिडो ड्राइवर बन मुंबई में घूम रहा था जैश से जुड़ा संदिग्ध, हुआ गिरफ्तार
1 day ago'चेहरे सामने आ गए...', TV देखकर हैंडलर ने टाइगर के हमलावरों को कैसे निकाला?
1 day ago4 राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर मतदान जारी, 27 को आएंगे परिणाम
3 days agoटाइगर श्रॉफ पर हमले से पहले अंधेरी के होटल रूम में हुई शूटिंग प्रैक्टिस
3 days agoनौकरी से जुर्म की दुनिया का सफर...टाइगर केस में कैसे फंसीं राधा-बबीता?
3 days agoलॉरेंस बिश्नोई गैंग के रडार पर कैसे आया बिहार? दिल्ली से मुंबई तक नेटवर्क
4 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines