सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर धार भोजशाला परिसर के आसपास हर शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज के लिए जगह को लेकर फिर से विवाद हो गया है. मुस्लिम पक्ष ने जिला प्रशासन की ओर से सुझाए गए मालीवाडा के पास 40 पीर पर नमाज को लेकर स्थान पर आपत्ति जताई है. मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट जाएगा, दूसरी जगह नमाज नहीं पढ़ेंगे.
मुस्लिम पक्ष ने कहा कि 'सुप्रीम कोर्ट ने मौला कमाल मस्जिद परिसर के बगल में या सटी हुई जगह पर नमाज की व्यवस्था करने का आदेश दिया था. इसके लिए समय दोपहर एक से तीन बजे तय किया गया था.'
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मुस्लिम पक्ष के मुख्य याचिकाकर्ता अब्दुल समद का आरोप है कि कलेक्टर ने तीन घंटे तक इंतजार करवाया और आखिर में एक कागज देकर कहा कि नमाज के लिए करीब 2 किलोमीटर दूर चालीस पीर दरगाह के पास जगह दी जा रही है. जबकि कोर्ट ने मस्जिद से सटी हुई जगह के लिए कहा था, ना कि दो किलोमीटर दूर. ये आदेश के गलत मायने नेकिला गए. 700 साल से चली आ रही परंपरा को तोड़ा जा रहा है और मुस्लिम समाज के अधिकारों का हनन हो रहा है.
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इसके लिए उन्होंने लिखित में आपत्ति दर्ज कराई है. उनका कहना है कि सभी याचिकाकर्ताओं और मध्यस्थों के साथ मिलकर वकीलों से चर्चा के बाद इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में फिर से चैलेंज करेंगे.
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जब पूछा गया कि क्या अगला आदेश आने तक चालीस पीर पर दी गई जमीन पर नमाज पढ़ेंगे, तो उन्होंने साफ मना कर दिया. उन्होंने बोला, 'हमारा मैन टारगेट मस्जिद कमाल मौला है, ना कि चालीस पीर दरगाह. कोर्ट ने परिसर के आंगन में अलग से एंट्री-एग्जिट के साथ जगह देने को कहा.'
बता दें, प्रशासन की ओर से जो जगह मुस्लिम पक्ष को दी गई थी, वहां पर शुक्रवार की नमाज नहीं पढ़ी गई.