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Vyapam घोटाले में 10 साल बाद आया फैसला; 7 दोषियों को 7-7 साल की जेल, 7 पॉइंट में जानें क्या था Scam

Bhopal MP Vyapam Scam Verdict: व्यापम घोटाले में सजा सुनाई गई है। CBI की विशेष अदालत ने आज 7 लोगों को दोषी करार दिया। व्यापम ने साल 2013 में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा ली थी, जिसमें घोटाला किए जाने के आरोप लगे थे। मामले की जांच CBI ने की और 10 साल बाद इसमें फैसला सुनाया गया है।

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जेल से बाहर आकर भी हैवानियत का खौफनाक चेहरा दिखाया।

Bhopal MP Vyapam Scam Verdiction: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले का फैसला आ गया है। मामले में दोषी करार दिए गए 7 लोगों को 7-7 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं 12 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। भर्ती परीक्षा घोटाला साल 2013 में सामने आया था।

केस में कुल 21 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें से 2 आरोपियों की मौत हो चुकी है। करीब 10 साल बाद केस में फैसला सुनाया गया है। CBI की विशेष अदालत ने आज मंगलवार को पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा घोटाले की सुनवाई की और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 7 आरोपियों को दोषी करार देते हुए कारावास की सजा सुनाई।

 

बड़े-बड़े लोगों तक पहुंची थी जांच की आंच

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जांच के दौरान 10 साल में 41 आरोपियों की मौत हो चुकी है। वहीं केस की जांच की आंच मध्य प्रदेश के उस समय के राज्यपाल राम नरेश यादव के बेटे शैलेश यादव तक पहुंची थी, लेकिन 25 मार्च 2015 को अचानक अचानक शैलेश की मौत हो जाने से मामले में मोड़ आया था। शैलेश घर में संदिग्ध हालात में मृत मिला था। राम नरेश भी केस में आरोपी थे। उस समय मुख्यमंत्री रहे शिवराज चौहान की जांच के दायरे में आए थे।

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क्या है व्यापम और क्या लगे आरोप?

मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (Vyapam) मध्य प्रदेश में मेडिकल कोर्स एंट्रेस एग्जाम, इंजीनियरिंग एंट्रेस एग्जाम, भर्ती एग्जाम कराने के लिए जिम्मेदार है। एग्जाम संबंधी सभी प्रक्रियाएं व्यापम द्वारा ही की जाती हैं, लेकिन व्यापम पर आरोप लगने लगे थे कि सांठ-गांठ करके रेवड़ियों की तरह सरकारी नौकरियां बांटी जाती हैं। इसके लिए मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला में फर्जीवाड़ा किया जाता है। मामला तब सामने आया, जब एक हजार फर्जी भर्तियां होने की सुगबुगाहट होने लगी। मेडिकल कॉलेज में भी 514 फर्जी भर्तियां करने का शक था।

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कैसे सामने आया घोटाला?

साल 2013 में MBBS भर्ती परीक्षा के दौरान पुलिस ने फर्जी परीक्षार्थी पकड़े थे। जांच में फर्जी भर्ती गिरोह का खुलासा हुआ। पूछताछ में डॉ. जगदीश सागर का नाम सामने आया, जिसने पूछताछ में उस समय के शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को लेकर खुलासे किए। 16 जून 2014 को लक्ष्मीकांत शर्मा गिरफ्तार हुए, जो उस समय व्यापम के अध्यक्ष भी थे। इसके बाद अरविंदो मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी, व्यापम के परीक्षा नियंत्रक डॉ. पंकज त्रिवेदी गिरफ्तार हुए। पूर्व मंत्री OP शुक्ला को नौकरी के बदले पैसे लेते रंगे हाथों दबोचा गया।

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क्या-क्या खुलासे हुए थे पूछताछ में?

  • पैसे लेकर मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले करवाए जाते थे।
  • मंत्री, अधिकारी, कॉलेजों के प्रिंसिपल तक रैकेट से जुड़े थे। दलाल डील कराते थे।
  • व्यापम के ऑफिस दाखिलों और नौकरियों में फर्जीवाड़ा का अड्डा था।
  • परीक्षा नियंत्रक डॉ. पंकज त्रिवेदी को लक्ष्मीकांत शर्मा आवेदकों की लिस्ट और रोल नंबर देते थे।
  • अलग-अलग तरीकों से एग्जाम और भर्ती में फर्जीवाड़ा किया जाता था।
  • परीक्षार्थी को फर्जी परीक्षार्थी के पास नकल करने के लिए बैठा दिया जाता था।
  • ओरिजिनल परीक्षार्थी की जगह फर्जी परीक्षार्थी को एग्जाम दिलाया जाता था।
  • परीक्षार्थी आंसर शीट खाली छोड़ता था, जिसे बाद में भरवाया जाता था।
  • अकसर भर्तियों के रिजल्ट जारी करते समय अंकों को बढ़ा दिया जाता था।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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