Arpit Pandey
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MP News: चुनाव लड़ने के लिए अक्सर लोग अपने सरकारी पदों से इस्तीफा दे देते हैं। आपने कई ऐसे उदाहरण देखें भी है। लेकिन ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। लेकिन मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में इसके उलट एक कहानी देखने को मिली है। जहां एक महिला सरपंच ने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए सरपंच पद से इस्तीफा दे दिया। क्योंकि महिला का चयन शिक्षक पद के लिए हुआ है।
बड़वानी जिले में आदिवासी तबके के छोटे बच्चों के भविष्य को बनाने के लिए अंजड़ की बेटी ने जो फैसला लिया है, वह सराहनीय है क्योंकि अंजड़ की मंजू राठौड़ की शादी बिल्वा रोड के युवक से हुई थी। भीलवाड़ा गांव में 8 महीने पहले सरपंच का चुनाव हुआ तो उन्होंने चुनाव लड़ा और 256 वोटों से जीत दर्ज की। सरपंच के चुनाव में यह जीत बड़ी मानी जाती है। लेकिन जब उनका चयन शिक्षक पद के लिए हुआ तो उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया।
10 महीने पहले गांव के लोगों ने मंजू को गांव का सरपंच चुना था, सरपंच रहते हुए गांव के विकास कार्यों के साथ ही मंजू राठौर ने संविदा शिक्षक वर्ग तीन की परीक्षा दी थी। जब परीक्षा का रिजल्ट आया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। क्योंकि उनका चयन शिक्षक पद के लिए हो गया था। लेकिन उनके सामने एक दुविधा थी कि अब गांव में रहकर गांव के विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाए या फिर शिक्षिका बन कर बच्चों का भविष्य बनाया जाए। यहां उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए सरपंच का पद छोड़ दिया। जिसकी सभी लोग सराहना कर रहे हैं।
शुक्रवार को मंजू अपने पति के साथ टिकरी जनपद पंचायत सीईओ के पास पहुंची और पंचायत इंस्पेक्टर की उपस्थिति में अपना त्यागपत्र सौंप दिया। अब मंजू शिक्षिका के तौर पर गांव चोतरियां में नौकरी ज्वाइन करेंगी। इस दौरान मंजू राठौर ने जनपद सीईओ और अधिकारियों को पद से इस्तीफा देने के दस्तावेज देते हुए सरपंच पद छोड़कर शिक्षिका बनने के अपने फैसले के बारे में बताया जिसको लेकर अधिकारियों ने भी उनकी जमकर तारीफ की और मिठाई खिलाकर उनका मुंह मीठा कराया।
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