Yashodhan Sharma
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छिंदवाड़ा: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लंपी वायरस से जानवरों के ग्रसित होने और उनकी मौत होने की खबर भी मिल रही है। परंतु प्रशासन अभी तक इस वायरस का जिले में प्रभाव स्वीकार करने के लिए भी तैयार नहीं है। पांढुर्ना, हर्रई, जुन्नारदेव, परासिया, बिछुआ सहित चारों तरफ इस वायरस का प्रभाव देखा जा रहा है। लेकिन अभी तक पशु चिकित्सा विभाग इस वायरस की पुष्टि तक नहीं कर पाया है। हालांकि, उनका कहना है कि हमने बड़ी संख्या में वैक्सीनेशन कर दिया है, बावजूद इसके धरातल पर ऐसे कोई प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं।
बता दें कि मंगलवार को पांढुर्णा के ग्राम पारडी में एक बैल की लंपी वायरस से मौत हो गई। इसके अलावा उस क्षेत्र के अन्य बहुत से जानवर भी इस वायरस के शिकार दिखाई दे रहे हैं। परंतु प्रशासन द्वारा जिले में अभी तक किसी भी जानवर में लंपी वायरस पाए जाने की पुष्टि तक नहीं की जा रही ।
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इसके पहले हर्रई के बटकाखापा क्षेत्र में जानवरों में लंपी वायरस का असर देखा गया था। कुछ जानवरों की मौत हुई थी। परंतु पशु चिकित्सा विभाग द्वारा जानवरों के सैंपल लेने के अलावा और कोई कदम नहीं उठाए गए जिससे आज तक पशु मालिकों को यह पुष्टि भी नहीं हो पाई है कि उनके पालतू जानवरों की मौत लंपी वायरस से हुई है या किसी और बीमारी से। इसके अलावा परासिया, जुन्नारदेव और बिछुआ क्षेत्र में भी अनेक जानवरों में लंपी वायरस के लक्षण पाए गए हैं । 1- 2 जानवरों की मौत भी हुई है परंतु इसकी पुष्टि करने के लिए संबंधित अधिकारी तैयार ही नहीं है ।
जिले में लंपी वायरस के बढ़ते हुए प्रभाव से एक तरफ जहां पशु पालक चिंतित नजर आ रहे हैं। बीमारी के खौफ के कारण दूध के धंधे पर भी असर पड़ रहा है। पशुपालक भयभीत हैं और अपने पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं । वहीं दूसरी ओर पशु चिकित्सा विभाग इतना समय बीत जाने के बाद भी अभी तक जिले में इस वायरस की पुष्टि भी नहीं कर पाया है ।
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संयुक्त उपसंचालक पशु चिकित्सा डॉक्टर परिवार का कहना है कि हमारे पास 25000 वैक्सीन उपलब्ध हैं। इसमें से 10,000 वैक्सीन हम लगा चुके हैं। हमारे द्वारा भोपाल सैंपल भेज दिए गए थे, परंतु अभी तक किसी की भी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। साथ ही वे जिले में लंपी वायरस से किसी भी जानवर की मौत की पुष्टि होने से इनकार करते हैं क्योंकि अभी तक सैंपल की रिपोर्ट ही नहीं आई है।
जिले में चारों तरफ पशुपालकों में इस बीमारी का खौफ बढ़ता जा रहा है और दूसरी तरफ प्रशासन जांच के नाम पर बीमारी के अस्तित्व से ही इंकार कर रहा है। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा प्रभावी कदम ना उठाए जाने के कारण पशुपालक नीम हकीम डॉक्टरों के की लपेट में आ कर लुट रहे हैं, जानवरों को बचाने के लिए देसी नुस्खे भी अपनाए जा रहे हैं। दूध का व्यापार भी समाप्त होता जा रहा है । अगर इसी तरह से प्रशासन उदासीनता रहता है तो जिले में यह बीमारी व्यापक रूप ले सकती है ।
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