झारखंड में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव 2026 को लेकर मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. राज्य के 48 शहरी निकायों में जारी मतदान के दौरान बड़ी संख्या में वोटर्स पोलिंग बूथों पर पहुंचे और अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी वोट डाला. इस चुनाव में कुल 562 उम्मीदवारों की राजनीतिक किस्मत दांव पर है. अब सभी की निगाहें चुनाव के नतीजों पर टिकी हुई हैं. जानकारी के मुताबिक, 27 फरवरी को सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी. सभी 48 शहरी निकायों के नतीजे एक ही दिन घोषित किए जाएंगे, ताकि रिजल्ट में पारदर्शिता बनी रहे. मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के खास इंतजाम किए जाएंगे और पूरी प्रक्रिया आयोग की निगरानी में होगी.
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कितने पदों के लिए हुआ चुनाव?
इन निकाय चुनावों में मेयर, डिप्टी मेयर, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षद जैसे पदों के लिए वोट डाले जा रहे हैं. अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं. इस बार वोटिंग बैलेट पेपर के जरिए करावाई जा रही है. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपनी पत्नी के साथ देवघर के पीएचडी कार्यालय में बने मतदान केंद्र में वोट डाला. इस दौरान उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से मतदान करवाने की वजह से बुजुर्गों और महिलाओं को लाइन में लगना पड़ रहा है. निशिकांत दुबे ने कहा कि विपक्ष को लगता है कि EVM से लोग पीएम मोदी या बीजेपी को वोट देते हैं. इसलिए बैलेट से कराने पर अड़े हैं. राज्य निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक, 48 नगर निकाय क्षेत्रों के लिए दोपहर 3 बजे तक 50.61 प्रतिशत मतदाताओं ने वोटिंग की. आयोग के मुताबिक, सबसे ज्यादा वोटिंग (64.2 प्रतिशत) चाकुलिया नगर पंचायत क्षेत्र के लिए और सबसे कम रांची नगर निगम के लिए (34.16 प्रतिशत) मतदान हुआ.
कैसा रहा मतदान?
मतदान के दौरान कुछ पोलिंग बूथ पर हंगामा भी हुआ. लेकिन कुल मिलाकर वोटिंग शांतिपूर्ण तरीके से हुई. नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं. कई जगहों पर युवाओं और महिलाओं की भागीदारी खास तौर पर नजर आई. प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे. मतदान प्रतिशत को लेकर आंकड़े संतोषजनक बताए जा रहे हैं. कई शहरी क्षेत्रों में वोटिंग को लेकर खासा उत्साह दिखा. मतदाताओं का कहना है कि वो अपने शहरों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं, साफ-सफाई और पारदर्शी प्रशासन चाहते हैं. अब चुनाव के नतीजे ये तय करेंगे कि अगले कार्यकाल में 48 शहरी निकायों की कमान किसके हाथों में जाएगी.
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