दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान शर्टलेस प्रोटेस्ट करने वाले युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया. दिल्ली पुलिस ने इन आरोपियों को हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया था, लेकिन जब उन्हें लेकर वापस आ रही थी तो शिमला पुलिस ने रास्ता रोक दिया. दोनों राज्यों की पुलिस के बीच करीब 21 घंटे तक नाटकीय घटनाक्रम और तीखी बहस चलती रही. मामला इतना बढ़ गया कि आज गुरुवार सुबह 6 बजे के करीब बड़ी मुश्किल से विवाद शांत हुआ और दिल्ली पुलिस आरोपियों को लेकर रवाना हो सकी. इस पूरे विवाद के कारण नेशनल हाईवे पर काफी समय तक तनाव की स्थिति बनी रही.
तीन राज्यों की पुलिस और नाटकीय पीछा
इस गिरफ्तारी अभियान में दिल्ली और हिमाचल के साथ-साथ हरियाणा पुलिस की टीम भी शामिल थी. हिमाचल पुलिस के मुताबिक दिल्ली और हरियाणा पुलिस ने मिलकर एक पुराने केस के सिलसिले में इन तीनों आरोपियों का पीछा किया और उन्हें हिरासत में लिया. हालांकि हिमाचल पुलिस ने प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस के काफिले को कई बार बीच रास्ते में रोका. आखिरकार सुबह-सुबह जब काफिला हिमाचल की सीमा से बाहर निकला, तब जाकर दिल्ली पुलिस ने राहत की सांस ली. पंजाब सीमा में दाखिल होते ही गाड़ियों में ईंधन भरवाया गया और फिर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई.
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अंबाला में मेडिकल और आरोपियों की पहचान
दिल्ली पुलिस ने पकड़े गए तीनों आरोपियों सौरभ सिंह, अरबाज खान और सिद्धार्थ का हरियाणा के अंबाला अस्पताल में मेडिकल टेस्ट करवाया. पकड़े गए आरोपियों में सौरभ सिंह उत्तर प्रदेश के अमेठी का रहने वाला है और वहां कांग्रेस की यूथ टीम का सक्रिय चेहरा है. दूसरा आरोपी अरबाज खान सुल्तानपुर का निवासी है और वह यूथ कांग्रेस के सेंट्रल यूपी जोन का उपाध्यक्ष है. तीसरा आरोपी सिद्धार्थ मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखता है और वह भी इंडियन यूथ कांग्रेस से जुड़ा हुआ है. ये तीनों ही राजधानी दिल्ली में हुए शर्टलेस विरोध प्रदर्शन के मामले में वांछित चल रहे थे.
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शिमला पुलिस का कड़ा एक्शन और जांच
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान शिमला पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस की एक गाड़ी को भी जब्त कर लिया. पुलिस ने दिल्ली की टीम को एनएच-5 पर रोककर अपनी जांच में शामिल होने का दबाव बनाया. दरअसल शिमला पुलिस ने भी इस मामले में एक अलग एफआईआर दर्ज की थी, जिसके संबंध में वे दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से पूछताछ करना चाहते थे. कई घंटों की मशक्कत और कानूनी कागजी कार्रवाई के बाद ही दिल्ली पुलिस आरोपियों को लेकर वहां से निकल पाई. इस घटना ने दो राज्यों के पुलिस बलों के बीच तालमेल की कमी और अधिकार क्षेत्र की लड़ाई को सरेआम उजागर कर दिया है.