Haryana News: हरियाणा के पलवल जिले के हथीन खंड के उटावड़ गांव में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ. बताया जा रहा है कि नूंह डीएसपी कार्यालय में रीडर के पद पर तैनात पुलिसकर्मी नरेंद्र कुमार ने नशे की हालत में अपनी तेज रफ्तार कार से स्कूल से लौट रहे तीन मासूम बच्चों को कुचल दिया. इस हादसे में दो बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीसरे की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे रोहतक पीजीआई रेफर किया गया है. घटना के बाद आरोपी पुलिसकर्मी मौके से भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने उसका पीछा कर उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया. मामले को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.
टक्कर मारकर भागने लगा था आरोपी पुलिसकर्मी
पुलिसकर्मी बच्चों को टक्कर मारकर भागने की कोशिश कर रहा था, तो आसपास के लोगों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी. हालांकि, पुलिस जब आरोपी को पकड़कर ले जाने लगी तो लोगों ने पुलिस की गाड़ी का भी पीछा किया, क्योंकि लोग चाहते थे कि आरोपी कॉन्स्टेबल का मेडिकल उनके सामने ही हो. आरोपी नूंह डीएसपी कार्यालय में रीडर है. मौके पर तनाव का माहौल देखते हुए आसपास के थानों की पुलिस को तैनात किया गया है.
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बच्चों के शव और घायल बच्चे की जांच
बता दें कि तीन बच्चों में से दो की मौत हो चुकी है. उनके शवों को नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में रखवाया गया है. वहीं, तीसरा, जो गंभीर रूप से घायल है उसे रोहतक PGI रेफर कर दिया गया है. मृतक बच्चों के पिता शाहबुद्दीन ने बताया कि उनका परिवार नूरिया मोहल्ले में रहता है. वह पेशे से ट्रक मैकेनिक हैं और गांव में ही उनकी दुकान है. उनके 3 बच्चे अयान जिसकी उम्र 5 वर्ष है, 7 वर्षीय अहसान और अरजान, जो 9 साल का है उटावड़ के गरीबा पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे. उन्होंने बताया कि अयान और अहसान पांचवीं कक्षा में पढ़ते थे. छुट्टी के बाद जब तीनों बच्चे स्कूल से घर जाने के लिए सड़क पर आए तो एक तेज रफ्तार कार ने तीनों को टक्कर मार दी. इस हादसे में अयान और अहसान की मौत हो गई है.
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वर्दी की धौंस दिखा रहा था आरोपी
बच्चों को टक्कर मारने के बाद कॉन्स्टेबल नरेंद्र कुमार लोगों से झगड़ा करने लगा था. वह मानने को तैयार नहीं था कि उसने बच्चों को टक्कर मारी है और उससे दो बच्चों की मौत हुई है. वह अपनी वर्दी की धौंस दिखा रहा था. इसलिए, गांव वालों का कहना था कि उसका मेडिकल सबके सामने हो ताकि किसी भी तरह पुलिस अपने सहकर्मी के बचाव के लिए सबूतों में गड़बड़ी न कर सकें.
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