पाकिस्तानी जासूस जबराराम गिरफ्तार, कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस कस्टडी मंजूर

राजस्थान इंटेलिजेंस ने जैसलमेर के पोखरण से पाकिस्तानी जासूस जबराराम को गिरफ्तार किया, जिस पर आईएसआई के लिए जासूसी और सेना की गोपनीय जानकारी साझा करने का आरोप है; अदालत ने 5 दिन की पुलिस कस्टडी मंजूर की.

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राजस्थान इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक और आरोपी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है. जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र से गिरफ्तार 28 वर्षीय जबराराम को माननीय न्यायालय ने 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजने के आदेश दिए हैं. आरोपी को कल पोखरण से गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद आज उसे जयपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां पुलिस की रिमांड को स्वीकार कर लिया गया.
इंटेलिजेंस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी जैसलमेर के पोकरण थाना क्षेत्र के नेडान गांव का निवासी है और उस पर आईएसआई के लिए काम करने तथा भारतीय सेना से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान भेजने के गंभीर आरोप हैं. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी हनीट्रैप और पैसों के लालच में आकर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हुआ.

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पुलिस के अनुसार, जबराराम पर ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. वर्ष 2025 में राजस्थान में जासूसी के 8 मामले सामने आए थे, जबकि 2026 में यह पहला मामला है. यह पूरी कार्रवाई एडीजी प्रफुल्ल कुमार के निर्देशन में इंटेलिजेंस की विशेष टीम द्वारा अंजाम दी गई.

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जांच अधिकारियों ने बताया कि एक प्राइम इनपुट मिलने के बाद आरोपी की गतिविधियों को तकनीकी निगरानी में लिया गया. जांच के दौरान ऐसे डॉक्यूमेंट्री और डिजिटल सबूत सामने आए हैं, जो पूर्व में पकड़े गए पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क से मेल खाते हैं. पुलिस का दावा है कि आरोपी एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था, जो सीमावर्ती इलाकों से संवेदनशील जानकारियां इकट्ठा कर पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स तक पहुंचाता था.

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जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी ने अपने नाम से सिम कार्ड जारी करवाकर उसे पाकिस्तानी एजेंट को सौंपा. इसके बाद व्हाट्सएप OTP साझा कर अकाउंट का एक्सेस दिया गया. इसी माध्यम से भारतीय सेना, सीमावर्ती क्षेत्रों और देश की संप्रभुता, एकता व अखंडता से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं साझा की गईं.

पुलिस के मुताबिक, आरोपी के हैंडलर से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड (DRI) भी बरामद किए गए हैं, जिनसे पता चलता है कि वह पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था. बताया जा रहा है कि ‘सिंदूर ऑपरेशन’ के समय से ही उसकी गतिविधियां संदिग्ध थीं और वह लगातार बॉर्डर पार बैठे अपने आकाओं के संपर्क में बना हुआ था.

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जांच में आरोपी के संपर्क में रहे तीन मोबाइल नंबर भी सामने आए हैं—एक भाटी के नाम से, दूसरा एसपी शर्मा के नाम से और तीसरा एक वर्चुअल नंबर, जिनके जरिए वह नियमित रूप से संवाद करता था.

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फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर नेटवर्क, फंडिंग चैनल और अन्य संभावित सहयोगियों की जानकारी जुटाने में लगी है. मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने से इनकार नहीं किया जा रहा.

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