नर्मदा जिले की सागबारा तालुका के नाल-खोपी और आसपास के 12 से 13 गांवों में वन विभाग द्वारा स्थानीय आदिवासियों को जमीन जोतने से रोकने पर विवाद काफी बढ़ गया है. वर्षों से खेती कर रहे आदिवासी किसानों के हक में अब खुद भरूच के BJP सांसद मनसुख वसावा मैदान में उतर आए हैं. उन्होंने अपनी ही सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए खोपी गांव में एक विशाल महासम्मेलन का आयोजन किया. आदिवासी किसानों की मांग के समर्थन में नांदोद विधायक डॉ. दर्शनाबेन देशमुख, जिला भाजपा प्रभारी अर्जुन चौधरी सहित भाजपा और आम आदमी पार्टी के नेता एक साथ नजर आए.
इस मुद्दे पर राजनीतिक सीमाएं भी टूटती नजर आईं. महासम्मेलन में सांसद वसावा के साथ नांदोद विधायक डॉ. दर्शनाबेन देशमुख, जिला भाजपा प्रभारी अर्जुन चौधरी और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता भी एक ही मंच पर आदिवासियों की मांगों का समर्थन करते दिखे.
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2002 से खेती कर रहे हैं स्थानीय आदिवासी
आदिवासियों को संबोधित करते हुए सांसद मनसुख वसावा ने कहा कि सागबारा के लोग पिछले 20 सालों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं. वे कोई घुसपैठिए या असामाजिक तत्व नहीं हैं. वसावा ने कहा, “सरकार अपना काम करेगी, हम अपना काम करेंगे. हम अपना हक और अधिकार कैसे जाने दे सकते हैं? अगर हमने लड़ाई बंद कर दी तो हमारा दावा खत्म हो जाएगा. महात्मा गांधी के बताए अहिंसक रास्ते पर चलकर हम अपने हक की लड़ाई जारी रखेंगे.”
वृक्षारोपण के नाम पर फर्जीवाड़े का आरोप
पत्रकारों से बातचीत के दौरान सांसद ने वन विभाग के अधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि 400 से 500 एकड़ जमीन खाली कराकर पौधारोपण के नाम पर बड़ा घोटाला किया जा रहा है. सांसद वसावा ने कहा, “मेरे पास कई सबूत हैं कि जो प्लांटेशन होते हैं, वे सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह जाते हैं. करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन सारा पैसा कहां जाता है, यह सब जानते हैं. 400-500 हेक्टेयर में पौधारोपण के नाम पर अधिकारी खूब माल-मलाई खाते हैं.”
सांसद वसावा ने वन विभाग पर उमरपाड़ा और सागबारा के आदिवासियों के बीच विवाद कराने का आरोप लगाया और जिले में सक्रिय फॉरेस्ट एजेंट्स को सुधर जाने की चेतावनी दी. उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि नर्मदा जिले ही नहीं, बल्कि पूरे गुजरात में पिछले 10-15 वर्षों में हुए प्लांटेशन का सर्वे कराया जाना चाहिए.
संबंधित विभाग के डीएफओ (DFO) से पूछा जाए कि लगाए गए पौधों में से आज कितने जीवित हैं? सांसद ने मांग की है कि वन विभाग नया अतिक्रमण भले ही रोके, लेकिन दशकों से खेती कर रहे गरीब आदिवासियों का हक न छीने.
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