गुजरात भूमि राजस्व (Amendment) विधेयक, 2025 विधानसभा में पारित हो गया है, जिसमें सरकार ने बिना एनए वाली जमीन के संबंध में फैसला लिया, जिससे गुजरात के 30 लाख से अधिक घरों को सीधा लाभ मिलेगा। विधेयक में संशोधन इस उद्देश्य से किया गया है कि राज्य में बिना अनुमति के बंजर भूमि पर किए गए निर्माणों को संपत्ति का अधिकार प्रदान कर विशेष आर्थिक लाभ प्रदान किया जा सके। इसमें राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को बुनियादी आवास जरूरतों का कानूनी अधिकार मिले और उनके समग्र हितों को सुनिश्चित किया जाए।
सरकार का मानना है कि संशोधनों के लागू होने से इस कानून से संबंधित व्याख्या संबंधी समस्याएं, मुकदमेबाजी और प्रशासनिक जटिलताएं कम हो जाएंगी। तभी सरकार को पता चला कि एनए के बिना भूमि लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। अब, बिना एनए के भूमि वाले लोगों को सीधे लाभ मिलेगा।
कानून के पारित होने से अब सोसायटियों के मकानों के मालिक, जो सालों से अपनी जमीन पर निर्माण करने के बाद नियमित नहीं हुए हैं, वे बाकी प्रीमियम, जुर्माना या ब्याज का भुगतान कर दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे और मकान को वैध किया जा सकेगा।
विधेयक का मकसद क्या है
मंत्री ने आगे कहा कि सरकार की यह उदारता उन लोगों के लिए है, जिन्होंने अपनी जमीन पर निर्माण तो कर लिया है, लेकिन किसी कारणवश आवश्यक अनुमति प्राप्त करने से चूक गए हैं। किसी ने अपनी जमीन बेचकर उसे खरीद लिया और उस पर मकान बना लिया। वह व्यक्ति इस बात से अनभिज्ञ है कि विक्रेता ने गैर-कृषि परमिट या अन्य विनियामक अनुमति प्राप्त नहीं की है। शर्त का अनजाने में उल्लंघन हुआ है। इस विधेयक का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कानून की जानकारी के अभाव या अनजाने में हुई गलती के कारण अनुबंध के उल्लंघन के कारण उन्हें नुकसान न उठाना पड़े।
मंत्री राजपूत ने कहा कि साल 2017 में संशोधित कानून में कुछ संशोधन करना जरूरी पाया गया, इसलिए गुजरात भूमि राजस्व अधिनियम, 1879 के अध्याय 9(ए) की धारा 125(6)(1) के प्रावधान को अधिक प्रभावी बनाने के तहत राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन विधेयक गुजरात भूमि राजस्व (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया गया है। तदनुसार, मौजूदा कानून की धारा-125(6)(1) में संशोधन किया गया है और धारा-125(6)(1)(1), धारा-125(6)(1)(2) और धारा-125(6)(1)(3) को जोड़ा गया है।
कांग्रेस नेता अमित चावड़ा और शैलेश परमार ने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा कि सूरत में सरकारी भूमि या चरागाह भूमि पर निर्माण को नियमित किया जाएगा या नहीं। इसका जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि किसी भी बिल्डर या सरकारी जमीन हड़पने वाले को फायदा नहीं होगा।
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