Gyanendra Sharma
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नई दिल्ली: इस सप्ताह निर्धारित सात और रैलियों के साथ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार अपने गृह राज्य गुजरात में 27 चुनाव प्रचार रैलियां की हैं, जो उनकी 2017 की 34 की संख्या के बराबर है। भाजपा इस बार तीन-तरफ़ा लड़ाई के बावजूद कह रही है कि उसे राज्य पर लगभग तीन दशकों की अपनी पकड़ बनाए रखने का भरोसा है। बीजेपी इस बार भी पीएम मोदी पर निर्भर है। राज्य के नेता पीएम के भरोसे ही चुनावी मैदान में हैं।
पीएम मोदी अपने अंतिम प्रयास में 1 दिसंबर को पहले दौर के मतदान के दिन तीन रैलियों को संबोधित करेंगे। उन क्षेत्रों में जहां 5 दिसंबर को दूसरे दौर में मतदान होगा। इनमें से पहला पंचमहल जिले के कलोल में होगा, उसके बाद छोटा उदयपुर का बोडेली और फिर हिम्मतनगर।
वह रात के लिए गांधीनगर लौट आएंगे। अगले दिन उनकी चार रैलियां हैं- कनकराज, फिर पाटन और सोजित्रा और अंत में अहमदाबाद, जहां वह रैली के अलावा रोड शो करेंगे। उन्होंने 20 नवंबर को सोमनाथ का दौरा करके अभियान शुरू किया था और चुनाव की तारीख की घोषणा से पहले कई सरकारी कार्यक्रमों के लिए राज्य में भी आए थे।
कांग्रेस ने अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण अभियान चलाया है। गुजरात चुनाव प्रबंधन ज्यादातर पड़ोसी राज्य राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कर रहे हैं। राहुल गांधी ने अपनी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से ब्रेक लेकर कुछ रैलियां की हैं।
गुजरात चुनाव में AAP ध्यान आकर्षित करने में कामयाब रही है। अरविंद केजरीवाल दिल्ली मॉडल को लेकर गुजरात में महौल बनाने की कोशिश की है। भाजपा के कुछ प्रमुख हिंदुत्व मतदाताओं को दूर करने पर दांव भी खेला गया। लेकिन भाजपा और कांग्रेस दोनों का कहना है कि आप केवल प्रचार की सवारी कर रही है जो वोटों में तब्दील नहीं होगी। बता दें कि चुनाव के परिणाम 8 दिसंबर को आएंगे। इसी दिन हिमाचल प्रदेश विधानसभा के भी रिजल्ट आएंगे।
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