Greater Noida News: 42 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 2.39 करोड़ ठगने वाले को नहीं मिली जमानत, नोएडा के रिटायर्ड अधिकारी को बनाया था शिकार

Greater Noida News: सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 2.39 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में आरोपी मुकेश सक्सेना की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि आरोपी की भूमिका गंभीर है।

top 5 fraud message, hackers 5 way, tips to safe personal account details, rbi guidelines, cyber dost app,

Photo Credit: Google

विज्ञापन

Greater Noida News: सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 2.39 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में आरोपी मुकेश सक्सेना की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि आरोपी की भूमिका गंभीर है। वह ठगी की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल रहा है।

रिटायर्ड अधिकारी से हुई थी ठगी
मामला विदेश सेवा से रिटायर्ड सुभाष चंद्र मल्होत्रा से जुड़ा है। इस मामले में साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। 18 मार्च 2025 को पुलिस ने जांच शुरू की थी। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि उन्हें 3 फरवरी से 11 मार्च 2025 तक 42 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। उन्हें मानसिक रूप से डरा-धमकाकर 2.39 करोड़ रुपये की ठगी की गई।

Advertisment

जांच में हुई पहचान
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी मुकेश सक्सेना ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर यह ठगी की थी। अभियोजन पक्ष ने बताया कि पीड़ित के खाते से निकाली गई रकम मुकेश के बैंक खाते में ट्रांसफर हुई। खाता दीप एंटरप्राइजेज फर्म के नाम से संचालित था। रिकॉर्ड से पता चला कि 25 फरवरी को मुकेश के खाते में करीब 17 लाख रुपये जमा हुए थे।

खाते की जानकारी सौंपी थी
मुकेश ने यह खाता और उससे जुड़ी सभी जानकारी यूजर आईडी, पासवर्ड और सिम कार्ड कैफ और इमरान को सौंप दिए थे। जिनके जरिए राशि ट्रांसफर की गई। बदले में मुकेश को 1.04 लाख रुपये की कमीशन राशि मिली, जिसमें 40 हजार नकद और 64 हजार उसकी पत्नी के पेटीएम खाते में भेजे गए।

अदालत ने माना गंभीर अपराध
इससे पहले मामले में अन्य आरोपी अनीश अहमद और पुष्पेंद्र की जमानत याचिकाएं भी खारिज की जा चुकी हैं। अदालत का मानना है कि इस तरह के साइबर अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा है। इन पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है।

विज्ञापन

विज्ञापन

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.

First published on:

Read more: About our editorial guidelines and standards here.

लेख समाप्त
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ