Stubble Burning Returns: जैसे-जैसे सर्दियां आ रही हैं, खेतों जलाने से एक बार फिर पूरे उत्तर भारत में एयर पॉव को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं. ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि इस सीजन में मध्य प्रदेश में पराली जलाने की सबसे ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं, जबकि पंजाब में गिरावट देखी गई है.
पराली जलाने की घटना तेज
इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के क्रीम्स बुलेटिन के मुताबिक 15 सितंबर से 6 अक्तूबर 2026 के बीच 7 राज्यों और दिल्ली में पराली में आग लगने की 287 घटनाएं दर्ज की गईं. मध्य प्रदेश में 118 घटनाएं हुईं, इसके बाद पंजाब में 88 और यूपी में 65 घटनाएं हुईं. ये आंकड़े दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने से पहले खेत की आग को कंट्रोल करने के लिए असरदार उपायों की जरूरत पर जोर डालते हैं.
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किसान पराली क्यों जलाते रहते हैं?
धान की कटाई के बाद खेतों को खाली करने और अगली फसल के लिए जमीन तैयार करने के लिए पराली जलाना किसानों के लिए एक आम तरीका है. हालांकि रेसिड्यू मैनेजमेंट मशीनरी की लागत, अवेलेबिलटी और पहुंच ऑप्शन को मुश्किल बना सकती है. ऐसे में मशीनरी तक पहुंच में सुधार करने और ऐसी टेक्नोलॉजीज जरूरत है जो पराली को कमर्शियल तौर से उपयोगी उत्पादों में बदल सकती हैं, जिससे किसानों को जलाने से बचने के का कारण मिलता है.
सैटेलाइट की मदद से मॉनिटरिंग
पराली की आग की पहचान करने के लिए सैटेलाइट-बेस्ड रिमोट सेंसिंग का इस्तेमाल पहले से ही किया जा रहा है. CREAMS सिस्टम बुलेटिन और डैशबोर्ड के जरिए मॉनिटरिंग डेटा प्रोवाइड करती है, जिससे अधिकारियों को घटनाओं पर नजर रखने में मदद मिलती है. 6 अक्टूबर को उपग्रहों ने 7 राज्यों और दिल्ली में 33 आग का पता लगाया, जिसमें मध्य प्रदेश में 24 घटनाएं हुईं. एक्सपर्ट सर्विलांस और वेरिफिकेशन में सुधार के लिए सैटेलाइट सर्विलांस को ऑन ग्राउंड वेरिफिकेशन और रियल टाइम इंफॉर्मेशन के साथ जोड़ने की सलाह देते हैं.
पराली को संसाधन में बदलना
बायोमास का यूज एक लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन हो सकता है, अगर किसानों को उन उद्योगों से जोड़ा जाए जो फसल के बचे हुए हिस्से को ईंधन या कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. हालांकि ये सिस्टम किफायती और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से प्रैक्टिकल होने चाहिए. दिल्ली-NCR में प्रदूषण की वजह सिर्फ पराली जलाना ही नहीं है. गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, कंस्ट्रक्शन की धूल और इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज भी हवा की खराब क्वालिटी के लिए जिम्मेदार हैं. प्रदूषण रोकने के कड़े उपायों के साथ-साथ, माइक्रोएल्गी-बेस्ड सिस्टम जैसी क्लाइमेट टेक्नोलॉजी पर भी विचार किया जा सकता. आने वाले दिनों में स्मॉग के संकट को रोकने के लिए आग की मॉनिटरिंग, किसानों के लिए प्रैक्टिकल ऑप्शन, कचरे का बेहतर इस्तेमाल और प्रदूषण के कई सोर्सेज के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जरूरत होगी.
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