कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में भूख हड़ताल कर रहे मशहूर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला किया है. सोनम की पत्नी गीतांजलि की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सोनम को दिल्ली के सरकारी अस्पताल सफदरजंग से मेदांता अस्पताल में भर्ती करने का आदेश दिया है और कहा है कि इलाज के लिए डॉक्टरों की एक टीम भी बनाई जाएगी. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने फैसला दिया.

CJP संसद मार्च में हिंसा-पथराव मामले में पुलिस का बड़ा एक्शन, 2 थानों में FIR दर्ज, 118 पुलिसकर्मी हुए थे घायल

---विज्ञापन---

सरकार को मेदांता में शिफ्टिंग से ऐतराज नहीं

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों और सरकार का पक्ष सुनने के बाद फैसला दिया. डॉक्टरों ने हाई कोर्ट को सोनम वांगचुक की लेटेस्ट हेल्थ रिपोर्ट दी. वहीं सरकार की ओर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उन्हें सोनम को मेदांता में शिफ्ट करने से कोई ऐतराज नहीं है. सफदरजंग अस्पताल में अब तक किए गए सभी उपचार की डिटेल, रिपोर्ट और अन्य डॉक्यूमेंट मेदांता अस्पताल को उपलब्ध कराए जाएंगे, लेकिन बिना डॉक्टरों की सलाह के डिस्चार्ज पर आपत्ति है.

---विज्ञापन---

डॉक्टरों की सलाह पर डिस्चार्ज करने की मांग

सॉलिसिटर जनरल ने हाई कोर्ट को बताया कि सोनम वांगचुक के साथ अस्पताल में रहने वाले लोगों ने उन्हें हॉस्पिटल से बाहर निकालना चाहते हैं, लेकिन सोनम वांगचुक अपनी पसंद का हॉस्पिटल और डॉक्टर चुन सकते हैं, पर उन्हें डिस्चार्ज डॉक्टरों की सलाह पर ही होना चाहिए और डॉक्टरों की निगरानी में ही उन्हें मेदांता भेजा जाना चाहिए. क्योंकि अगर सोनम अस्पताल से निकलकर वापस जंतर-मंतर चले गए और वहां भूख हड़ताल से उन्हें कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

---विज्ञापन---

‘डिस्चार्ज करो, संसद मार्च में जाना है मुझे’, सोनम वांगचुक ने हॉस्पिटल को लिखी चिट्ठी, 28 जुलाई से जारी है भूख हड़ताल

---विज्ञापन---

सोनम को डॉक्टरों की निगरानी की जरूरत

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र सरकार सोनम वांगचुक की हेल्थ के मामले में कोई रिस्क नहीं ले सकती, क्योंकि उनकी हेल्थ बिगड़ने का सीधा असर सरकार पर पड़ेगा. दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट पढ़कर लगता है कि सोनम वांगचुक की हेल्थ की निगरानी होनी अनिवार्य है. लेकिन निगरानी कहीं भी की जा सकती है, वे चाहे सफदरजंग में रहें या मेदांता में रहें, इलाज दोनों जगह होगा और डॉक्टरों की निगरानी भी होगी तो मेदांता शिफ्ट किया जा सकता है.

---विज्ञापन---