AISA students end fast Jantar Mantar: जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के साथ 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्रों नेहा, मनीष और आमीन ने आज 23 दिनों बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है. नागरिक समाज के दिग्गजों और राजनीतिक नेताओं के विशेष अनुरोध के बाद गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया. इसके बाद अब सबकी नजरें जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर टिकी हैं, जिन्होंने सफदरजंग अस्पताल से संदेश दिया है कि यदि सरकार हालिया पेपर लीक और शिक्षा विफलताओं पर जवाबदेही तय करने का संसद में आश्वासन देती है तो वे भी अपना अनशन समाप्त कर देंगे.
23 दिन, 12% वजन घटा, क्यों तोड़ा छात्रों ने अनशन?
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और आइसा (AISA) के बैनर तले छात्र पिछले तीन हफ्तों से ज्यादा समय से डटे हुए थे. 23 दिनों तक केवल नमक और पानी पर टिके रहने के कारण इन तीनों छात्रों का वजन 12 प्रतिशत से अधिक घट गया था और उनका ब्लड शुगर खतरनाक स्तर तक नीचे आ गया था. आयोजकों ने स्पष्ट किया कि अनशन समाप्त करने का मतलब आंदोलन वापस लेना नहीं है, बल्कि आंदोलन की रणनीति में बदलाव करते हुए विरोध दर्ज कराने की नई रणनीति तैयार की गई है. अब 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के बाद देश के 50 से अधिक विश्वविद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.
क्या सोनम वांगचुक भी तोड़ेंगे अनशन?
21वें दिन पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद वांगचुक की सेहत स्थिर बनी हुई है, हालांकि उनके ब्लड पैरामीटर्स में उतार-चढ़ाव जारी है. वांगचुक ने स्पष्ट कहा है कि वे आंदोलन को जिद का विषय नहीं बनाना चाहते. यदि पक्ष और विपक्ष के सांसद अस्पताल या संसद परिसर में उनसे मिलकर मानसून सत्र में 'शिक्षा में जवाबदेही' का मुद्दा उठाने का भरोसा देते हैं, तो वे तुरंत अनशन खत्म कर देंगे.
AISA students end fast Jantar Mantar: जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के साथ 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्रों नेहा, मनीष और आमीन ने आज 23 दिनों बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है. नागरिक समाज के दिग्गजों और राजनीतिक नेताओं के विशेष अनुरोध के बाद गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया. इसके बाद अब सबकी नजरें जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर टिकी हैं, जिन्होंने सफदरजंग अस्पताल से संदेश दिया है कि यदि सरकार हालिया पेपर लीक और शिक्षा विफलताओं पर जवाबदेही तय करने का संसद में आश्वासन देती है तो वे भी अपना अनशन समाप्त कर देंगे.
23 दिन, 12% वजन घटा, क्यों तोड़ा छात्रों ने अनशन?
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और आइसा (AISA) के बैनर तले छात्र पिछले तीन हफ्तों से ज्यादा समय से डटे हुए थे. 23 दिनों तक केवल नमक और पानी पर टिके रहने के कारण इन तीनों छात्रों का वजन 12 प्रतिशत से अधिक घट गया था और उनका ब्लड शुगर खतरनाक स्तर तक नीचे आ गया था. आयोजकों ने स्पष्ट किया कि अनशन समाप्त करने का मतलब आंदोलन वापस लेना नहीं है, बल्कि आंदोलन की रणनीति में बदलाव करते हुए विरोध दर्ज कराने की नई रणनीति तैयार की गई है. अब 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के बाद देश के 50 से अधिक विश्वविद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.
क्या सोनम वांगचुक भी तोड़ेंगे अनशन?
21वें दिन पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद वांगचुक की सेहत स्थिर बनी हुई है, हालांकि उनके ब्लड पैरामीटर्स में उतार-चढ़ाव जारी है. वांगचुक ने स्पष्ट कहा है कि वे आंदोलन को जिद का विषय नहीं बनाना चाहते. यदि पक्ष और विपक्ष के सांसद अस्पताल या संसद परिसर में उनसे मिलकर मानसून सत्र में ‘शिक्षा में जवाबदेही’ का मुद्दा उठाने का भरोसा देते हैं, तो वे तुरंत अनशन खत्म कर देंगे.