दिल्ली सरकार की अपील पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने शहर के तीन सबसे व्यस्त और जाम वाले रास्तों को सुधारने की जिम्मेदारी संभाल ली है. लगभग एक साल पहले किए गए अनुरोध के बाद अब NHAI ने इन कॉरिडोर के लिए फिजिबिलिटी स्टडी और डीपीआर (DPR) तैयार करने का काम शुरू कर दिया है. इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य मकसद दिल्ली की अंदरूनी सड़कों पर वाहनों के भारी दबाव को कम करना और ट्रैफिक की रफ्तार को बढ़ाना है. इस पहल से न केवल दिल्ली बल्कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के लाखों यात्रियों को रोजाना लगने वाले लंबे जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

मथुरा रोड और रोहतक रोड पर सफर होगा आसान

इस योजना में शामिल पहला प्रमुख रास्ता मथुरा रोड है, जो इंडिया गेट से बदरपुर तक करीब 15 किलोमीटर लंबा है. इस मार्ग पर निजामुद्दीन, भोगल और अपोलो अस्पताल जैसी सात मुख्य लालबत्तियां हैं जहां अक्सर गाड़ियां रेंगती नजर आती हैं. दूसरा रास्ता रोहतक रोड है जो पंजाबी बाग से शुरू होकर पीरागढ़ी होते हुए हरियाणा बॉर्डर तक जाता है. करीब 17 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर पीरागढ़ी, नांगलोई और मुंडका जैसे छह प्रमुख जंक्शन हैं जहां भारी वाहनों के दबाव के कारण लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है. इन रास्तों के सिग्नल फ्री होने से बहादुरगढ़ और फरीदाबाद के बीच आवाजाही बेहद सुगम हो जाएगी.

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एमजी रोड की लाइफलाइन को मिलेगी नई रफ्तार

दिल्ली और गुरुग्राम के बीच सफर करने वाले लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए एमजी रोड (मेहरौली-गुरुग्राम मार्ग) किसी लाइफलाइन से कम नहीं है. अंधेरिया मोड़ से गुरुग्राम बॉर्डर तक जाने वाला यह 18 किलोमीटर लंबा रास्ता बेहद व्यस्त रहता है और यहाँ सुल्तानपुर व घिटोरनी जैसी चार प्रमुख लालबत्तियां जाम का कारण बनती हैं. NHAI की योजना के तहत अब इन जंक्शन्स को सुधारने और जरूरत के अनुसार फ्लाईओवर या अंडरपास बनाने पर काम किया जाएगा. केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा के अनुसार इन परियोजनाओं से यात्रियों के समय में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आएगी और वाहनों की औसत गति बढ़ने से ईंधन की बचत भी होगी.

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नया इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर जीवन स्तर का वादा

आमतौर पर दिल्ली की अंदरूनी सड़कों की देखरेख पीडब्ल्यूडी (PWD) करती है, लेकिन इन रास्तों की जटिलता और नेशनल हाईवे से इनके जुड़ाव को देखते हुए यह काम NHAI को सौंपा गया है. डीपीआर के जरिए यह तय होगा कि किस जंक्शन पर फुटओवर ब्रिज या सड़क चौड़ीकरण की जरूरत है. अगर ये प्रोजेक्ट समय पर पूरे होते हैं तो यह न केवल दिल्ली की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे बल्कि प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी सहायक होंगे. वर्षों से लालबत्तियां हटने का इंतजार कर रहे लाखों लोगों के लिए यह एक बड़ी और सकारात्मक शुरुआत मानी जा रही है.

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