मुख्य जानकारियां:
- दिल्ली-एनसीआर में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए ग्रेटर SPR रोड प्रोजेक्ट का काम तेजी से शुरू हो गया है.
- इस बड़ी परियोजना के तहत 14 अलग-अलग गांवों की कुल 670 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा.
- जमीन के बदले किसानों को स्थान के आधार पर 6 करोड़ से लेकर अधिकतम 11 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा मिलेगा.
- पूरे भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की इस सरकारी प्रक्रिया पर लगभग 6,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.
- यह नया रोड कॉरिडोर गुरुग्राम और मानेसर को सीधे जोड़ते हुए दिल्ली-जयपुर हाईवे के ट्रैफिक के दबाव को कम करेगा.
ग्रेटर SPR रोड प्रोजेक्ट को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. दिल्ली-एनसीआर में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) ने ग्रेटर साउदर्न पेरिफेरल रोड (ग्रेटर SPR) परियोजना के काम को बहुत तेज कर दिया है. इस बेहद महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर के निर्माण के लिए दिल्ली-एनसीआर के 14 गांवों की कुल 670 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही है. इस भूमि अधिग्रहण के बदले प्रभावित किसानों को प्रीमियम लोकेशन पर 1 एकड़ जमीन के लिए 11 करोड़ रुपये तक का बंपर मुआवजा दिया जाएगा. इस रोड के पूरी तरह तैयार होने से गुरुग्राम, मानेसर और दिल्ली-जयपुर हाईवे के बीच शानदार रोड कनेक्टिविटी मिलेगी और ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी.
ग्रेटर SPR परियोजना क्या है?
ग्रेटर साउदर्न पेरिफेरल रोड (Greater SPR) दिल्ली-एनसीआर की एक बेहद महत्वाकांक्षी और बड़ी सड़क परियोजना है. हालांकि यह योजना साल 2013 से ही लंबित चल रही थी, लेकिन कई तरह के कानूनी विवादों और अड़चनों के कारण इसका काम आगे नहीं बढ़ सका था. अब सभी कानूनी रुकावटें पूरी तरह दूर होने के बाद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) ने जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया को मिशन मोड पर तेज कर दिया है. जेएमएस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह के अनुसार यह नया रोड नेटवर्क पूरे बेल्ट में शहरी और आवासीय विकास को एक नई और तेज दिशा प्रदान करेगा.
जमीन का अधिग्रहण किन दो चरणों में पूरा किया जाएगा?
इस विशाल रोड प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए कुल 14 गांवों की 670 एकड़ भूमि का अधिग्रहण व्यावहारिक रूप से दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा. पहले चरण के तहत बहरामपुर, मैदावास, उल्लावास, कादरपुर, धुमसपुर और बादशाहपुर सहित आस-पास के अन्य प्रमुख गांवों की लगभग 276 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण में मानेसर, अकलीमपुर, शिकोहपुर, टीकली, सकतपुर, नौरंगपुर, बार गुर्जर और नैनवाल गांवों की लगभग 394 एकड़ जमीन ली जाएगी, जिससे आगे के निर्माण का रास्ता साफ होगा.
किसानों को कितना मुआवजा मिलेगा?
ग्रेटर SPR के दायरे में आने वाली जमीनों के लिए किसानों को बहुत बड़ी राहत राशि दी जा रही है. जानकारों के मुताबिक इस पूरी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर सरकार की तरफ से लगभग 6,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च किया जाएगा. सामान्य क्षेत्रों में किसानों को 6 से 8 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा मिलेगा. वहीं प्राइम और प्रीमियम लोकेशन वाले इलाकों, विशेषकर शिकोहपुर और उसके पास के क्षेत्रों में यह राशि 11 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक जाएगी. यानी जिन किसानों की 5 से 8 एकड़ जमीन अधिग्रहित होगी, उन्हें 55 से 88 करोड़ रुपये का भारी मुआवजा मिलेगा.
गुरुग्राम और मानेसर के लोगों कों मिलेगी राहत
गुरुग्राम और मानेसर लगातार बहुराष्ट्रीय कंपनियों और नए आवासीय सेक्टरों के हब बनते जा रहे हैं, जिसके कारण यहाँ की मौजूदा सड़कों पर गाड़ियों का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है. व्हाइटलैंड कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर स्ट्रेटजी सुदीप भट्ट का कहना है कि ग्रेटर SPR एक गेमचेंजर कॉरिडोर साबित होगा. इस बाईपास रोड के बनने से रोजाना सफर करने वाले हजारों कामकाजी लोगों को भारी ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए बड़ी मुक्ति मिल जाएगी. इसके साथ ही दिल्ली-जयपुर हाईवे और अन्य प्रमुख संपर्क मार्गों से सीधा जुड़ाव होने के कारण सफर का समय भी काफी घट जाएगा.
निवेश को लेकर एक्सपर्ट्स का क्या अनुमान है?
इस महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के शुरू होने की खबर से ही दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट और व्यावसायिक गलियारों में भारी उत्साह देखा जा रहा है. नई सड़क के किनारे स्थित संपत्तियों और खाली जमीनों की मांग में अभी से जबरदस्त तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है. बेहतर रोड कनेक्टिविटी के कारण बड़ी कंपनियां और निवेशक इस क्षेत्र में नया पूंजी निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में ग्रेटर साउदर्न पेरिफेरल रोड से जुड़े हुए सभी क्षेत्र गुरुग्राम के सबसे महंगे और प्रीमियम लाइफस्टाइल डेस्टिनेशन के रूप में उभरेंगे.
ग्रेटर SPR जमीन अधिग्रहण और मुआवजा विवरण सारणी:
| अधिग्रहण का चरण | शामिल होने वाले मुख्य गांवों के नाम (Entities) | कुल अधिग्रहित भूमि (एकड़ में) | संभावित मुआवजा दर (प्रति एकड़) | मुख्य कनेक्टिविटी लाभ |
| पहला चरण | बहरामपुर, मैदावास, उल्लावास, कादरपुर, धुमसपुर, बादशाहपुर | लगभग 276 एकड़ | 6 से 8 करोड़ रुपये | गुरुग्राम के नए सेक्टरों और स्थानीय सड़कों से जुड़ाव |
| दूसरा चरण | मानेसर, अकलीमपुर, शिकोहपुर, टीकली, सकतपुर, नौरंगपुर, नैनवाल | लगभग 394 एकड़ | 11 करोड़ रुपये तक (प्रीमियम लोकेशन) | दिल्ली-जयपुर हाईवे और इंडस्ट्रियल एरिया से सीधा जुड़ाव |
निष्कर्ष:
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा ग्रेटर SPR परियोजना को दोबारा गति देना दिल्ली-एनसीआर के विकास के लिए एक बहुत बड़ा कदम है. 11 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक के भारी मुआवजे से जहां स्थानीय किसान आर्थिक रूप से मजबूत होंगे, वहीं यह नया रोड कॉरिडोर गुरुग्राम और मानेसर में उद्योग, निवेश और रियल एस्टेट को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा.
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