Delhi Kedarnath: चारधाम श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी! दिल्ली से केदारनाथ-बद्रीनाथ जाना होगा बेहद आसान, जानिए क्या है सरकार का मास्टर प्लान
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मेरठ-ऋषिकेश रैपिड रेल और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर काम तेज हो गया है, जिससे चारधाम यात्रा का समय आधा रह जाएगा.
चार धाम यात्रा मेरठ-ऋषिकेश रैपिड रेल प्रोजेक्ट क्या है?
मुख्य जानकारियां:
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दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल को आगे मुजफ्फरनगर होते हुए हरिद्वार और ऋषिकेश से जोड़ा जाएगा.
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का करीब 75 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है.
इस नए पहाड़ी रेल मार्ग पर जून 2028 में शिवपुरी से ब्यासी के बीच पहला रेल ट्रायल किया जाएगा.
इस प्रोजेक्ट के तहत देवप्रयाग से जनासू के बीच 14.58 किलोमीटर लंबी सबसे बड़ी सुरंग बनाई जा रही है.
नई रेल कनेक्टिविटी से दिल्ली से कर्णप्रयाग का सफर 12 घंटे से घटकर सिर्फ 6 घंटे का रह जाएगा.
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए उत्तराखंड की चारधाम यात्रा आने वाले समय में बेहद आसान और आधे समय में पूरी होने वाली है. सरकार ने दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल को आगे मुजफ्फरनगर होते हुए हरिद्वार और ऋषिकेश से जोड़ने के प्लान को हरी झंडी दे दी है. इसके साथ ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का निर्माण कार्य भी अंतिम दौर में है. इन दोनों बड़े प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से दिल्ली से कर्णप्रयाग की यात्रा, जिसमें अभी 11 से 13 घंटे का लंबा समय लगता है, वह घटकर मात्र 5 से 6 घंटे रह जाएगी. इससे तीर्थयात्रियों के करीब 7 घंटे बचेंगे.
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दिल्ली-मेरठ-ऋषिकेश नमो भारत कॉरिडोर का पूरा रूट
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए नमो भारत कॉरिडोर को विस्तार दिया जा रहा है. मेरठ-ऋषिकेश नमो भारत कॉरिडोर को मोदीपुरम (मेरठ) से लेकर लक्ष्मण झूला (ऋषिकेश) तक बनाया जाएगा. यह पूरा रूट पहले से ही दिल्ली से जुड़ा हुआ है. इस नए 150 किलोमीटर लंबे रूट पर रैपिड रेल 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी. इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के तैयार होने से श्रद्धालुओं को भारी ट्रैफिक वाले पुराने सड़क रास्तों से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी और वे बेहद कम समय में सीधे ऋषिकेश पहुंच सकेंगे.
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा?
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन प्रोजेक्ट पहाड़ों के बीच भारतीय रेलवे का एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. यह पूरा रेल रूट लगभग 125 किलोमीटर लंबा है, जिसमें कुल 12 रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं. इस रूट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका 85 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 105 किलोमीटर रेल मार्ग सुरंगों और पुलों से होकर गुजरेगा. प्रोजेक्ट में कुल 16 सुरंगे और 35 पुल शामिल हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बड़े प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी. इस लाइन के चालू होने से ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी सड़क मार्ग के 173 किलोमीटर के मुकाबले घटकर सिर्फ 125 किलोमीटर रह जाएगी.
पहला ट्रायल कब होगा और सबसे लंबी सुरंग कहां बनाई जा रही है?
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के डिप्टी जनरल मैनेजर ओपी मालगुडी ने बताया कि इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का लगभग 75 फीसदी काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है. पूरी योजना को साल 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है. रेल लाइन का पहला सुरक्षा ट्रायल जून 2028 में ऋषिकेश के शिवपुरी से ब्यासी तक किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट की सबसे छोटी सुरंग केवल 200 मीटर की है, जबकि सबसे बड़ी सुरंग की लंबाई 14.58 किलोमीटर है. यह विशाल सुरंग देवप्रयाग से जनासू के बीच आधुनिक टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम की मदद से खोदी जा रही है.
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भारत-तिब्बत-चीन सीमा के लिए इस रेल मार्ग का महत्व
यह रेल लाइन न केवल उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया जीवन देगी, बल्कि देश की सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा गेमचेंजर साबित होगी. इस रेल मार्ग के बन जाने से भारत-तिब्बत-चीन सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों तक रसद, हथियार और जरूरी सैन्य साजोसामान बहुत तेजी से पहुंचाना संभव हो सकेगा. अभी तक उत्तराखंड में देहरादून, ऋषिकेश, कोटद्वार और काठगोदाम ही अंतिम रेलवे स्टेशन थे, जिन्हें अंग्रेजों ने विकसित किया था. लेकिन अब भारतीय रेल पहली बार पर्वतीय क्षेत्रों के अंदर प्रवेश कर देश की सीमाओं को अभेद्य बनाने जा रही है.
कर्णप्रयाग से केदारनाथ धाम तक पहुंचने का रास्ता और दूरी
कर्णप्रयाग पहुंचने के बाद केदारनाथ धाम की आगे की यात्रा सड़क मार्ग और पैदल ट्रेक को मिलाकर लगभग 120 से 125 किलोमीटर की रह जाती है. श्रद्धालुओं को कर्णप्रयाग से सोनप्रयाग होते हुए गौरीकुंड तक करीब 105 किलोमीटर की दूरी कार या बस से तय करनी होती है, जिसमें 3.5 से 4 घंटे का समय लगता है. गौरीकुंड को चारधाम यात्रा का मुख्य बेस कैंप माना जाता है. गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक की आगे की 16 किलोमीटर की खड़ी और कठिन चढ़ाई को पूरा करने में पैदल यात्रियों को लगभग 6 से 8 घंटे का समय लगता है, जिसे लोग हेलीकॉप्टर से भी पूरा करते हैं.
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केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में दर्शन और आरती की समय सारणी:
केदारनाथ धाम मंदिर समय (Kedarnath Temple Timings):
विशेष महाअभिषेक पूजा: सुबह 4:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक.
सामान्य दर्शन: सुबह 6:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक.
कपाट बंद (विश्राम): दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक.
शाम के दर्शन: शाम 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक.
शृंगार आरती व शयन आरती: शृंगार आरती शाम 7:30 बजे और शयन आरती रात 8:30 बजे होती है. रात 9:00 बजे कपाट बंद हो जाते हैं.
बद्रीनाथ धाम मंदिर समय (Badrinath Temple Timings):
मंगला आरती व महाअभिषेक: सुबह 4:30 बजे से विशेष पूजा शुरू होती है.
सामान्य दर्शन: सुबह 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक.
कपाट बंद (भोग व विश्राम): दोपहर 1:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक.
शाम के दर्शन: शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक.
शाम की मुख्य आरती: शाम 6:00 बजे से 7:00 बजे के बीच आयोजित होती है.
शयन आरती: रात 8:30 बजे होती है और रात 9:00 बजे मंदिर बंद कर दिया जाता है.
चारधाम यात्रा समय और दूरी तुलना सारणी (Table):
यात्रा का रूट
वर्तमान समय (सड़क मार्ग)
संभावित समय (रैपिड व बुलेट रेल)
रूट की कुल लंबाई
मुख्य विशेषताएं
दिल्ली एनसीआर से ऋषिकेश
5 से 6 घंटे
2.5 से 3 घंटे
150 किलोमीटर
नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर (रफ्तार 160 किमी/घंटा)
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग
5 से 6 घंटे
2 से 2.5 घंटे
125 किलोमीटर
16 सुरंगे (सबसे बड़ी 14.58 किमी देवप्रयाग-जनासू)
कुल यात्रा (दिल्ली से कर्णप्रयाग)
11 से 13 घंटे
5 से 6 घंटे
–
कुल
निष्कर्ष:
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मेरठ-ऋषिकेश रैपिड रेल और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन उत्तराखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होने वाली हैं. इन दोनों ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से न केवल आम शिवभक्तों की चारधाम यात्रा सुगम होगी, बल्कि चीन सीमा तक भारतीय सेना की पहुंच मजबूत होने के साथ पहाड़ पर रेल का दशकों पुराना सपना साकार होगा.
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