दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में सरकारी शिक्षक भी लगाए गए हैं. शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वो स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ BLO के तौर पर SIR से जुड़ा काम भी पूरा करें. लेकिन शिक्षकों का कहना है कि दोहरी जिम्मेदारी के चलते उनके लिए स्कूल और चुनावी ड्यूटी दोनों के साथ न्याय करना मुश्किल हो रहा है. शिक्षकों का कहना है कि उन्हें चुनावी प्रक्रिया में काम करने से कोई आपत्ति नहीं है.
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क्या है टीचर्स की शिकायत?
शिक्षकों ने कहा कि चुनाव हो, आपदा हो या कोई दूसरी आपात स्थिति सरकारी कर्मचारी के तौर पर वो हर जिम्मेदारी निभाते आए हैं. लेकिन SIR के दौरान उन्हें घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करना पड़ता है, दस्तावेजों और मतदाता सूची से जुड़े काम करने पड़ते हैं. इस दौरान कई बार लोगों की नाराजगी और गाली-गलौज का भी सामना करना पड़ता है. शिक्षकों का दावा है कि अपनी समस्याओं को लेकर वे कई बार दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से पत्राचार कर चुके हैं और मुलाकात भी कर चुके हैं.
शिक्षकों का क्या कहना है?
टीचर्स का कहना है कि वे चुनावी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रहे, लेकिन स्कूल में बच्चों को पढ़ाने और SIR की ड्यूटी दोनों जिम्मेदारियों के लिए पर्याप्त समय और संसाधन मिलना जरूरी है. सुबह स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाना और उसके बाद SIR की ड्यूटी के लिए निकलना शिक्षकों के लिए रोजमर्रा की दोहरी जिम्मेदारी बन गई है. शिक्षकों के सामने अब सवाल सिर्फ अतिरिक्त काम का नहीं, बल्कि दोहरी जिम्मेदारी के बीच दोनों कामों के साथ न्याय करने का है. उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में ना वे बच्चों की पढ़ाई को पर्याप्त समय दे पा रहे हैं और न ही SIR की जिम्मेदारी को उस तरह निभा पा रहे हैं, जैसा चुनाव आयोग उनसे अपेक्षा करता है. इसी वजह से शिक्षक खुद को असहाय और दबाव में महसूस कर रहे हैं और सिस्टम से समाधान की उम्मीद कर रहे हैं.