मुख्य बिंदु:

  • प्रोजेक्ट का रूट: यह नया एलिवेटेड कॉरिडोर दिल्ली के मौजूदा 55 किलोमीटर लंबे रिंग रोड (महात्मा गांधी मार्ग) के ऊपर बनाया जाएगा.
  • पहले फेज का प्लान: पहले चरण में करीब 25 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रास्ता बनेगा, जो मेटकाफ हाउस से शुरू होकर आश्रम के पास डीएनडी फ्लाईवे तक जाएगा.
  • पहले फेज के तीन हिस्से: इसके तहत आजादपुर चौक से मेटकाफ हाउस (7 किमी), मजनू का टीला से सलीलगढ़ किला (5 किमी) और सलीलगढ़ किला से डीएनडी फ्लाईवे तक का निर्माण होगा.
  • कुल लंबाई: मुख्य कॉरिडोर के अलावा जब इसमें रैंप, लूप्स और कनेक्टिंग सड़कों को जोड़ा जाएगा, तो इस पूरे प्रोजेक्ट की लंबाई लगभग 80 किलोमीटर हो जाएगी.
  • चौराहों से मुक्ति: मौजूदा रिंग रोड पर 11 प्रमुख चौराहे (इंटरसेक्शंस) आते हैं, लेकिन इस नए कॉरिडोर में एंट्री और एग्जिट के लिए 15 इंटरचेंज और 23 एप्रोच रोड बनाए जाएंगे.
  • अगले फेज का विस्तार: बाद के चरणों में इस रोड को आश्रम से आगे मूलचंद, लाजपत नगर, एम्स, सफदरजंग, मोती बाग और राजौरी गार्डन होते हुए वापस आजादपुर चौक तक जोड़ा जाएगा.

Signal Free Roads: दिल्ली में रहने वाले और रोजाना सड़कों पर सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए एक बेहद शानदार खबर आई है. राजधानी की सड़कों पर गाड़ियों के बढ़ते भारी दबाव और जाम की समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने एक बहुत बड़ी योजना तैयार की है. लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी के मंत्री परवेश साहिब सिंह के मुताबिक दिल्ली के सबसे व्यस्त रास्तों में से एक 55 किलोमीटर लंबे मौजूदा रिंग रोड के ऊपर एक नया एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा. यह पूरा प्रोजेक्ट सरकार की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत शहर में ट्रैफिक कम करना, प्रदूषण का स्तर घटाना और सड़क हादसों को रोकना शामिल है. इसके बनने से उत्तर, उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के बीच आवाजाही पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगी.

दो चरणों में पूरा होगा यह मेगा प्रोजेक्ट

यह विशाल कॉरिडोर दो अलग-अलग चरणों में कुल छह सेक्शन के तहत विकसित किया जाएगा. पहले चरण के तहत तीन प्राथमिकता वाले रास्तों को मंजूरी मिल चुकी है और फिलहाल इसकी फिजिबिलिटी स्टडी और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर की समीक्षा की जा रही है. इसके बाद अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्ताव को यूटीटीआईपीईसी के पास भेजा जाएगा. पहले चरण में लगभग 25 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रास्ता तैयार किया जाएगा, जो सिविल लाइंस के मेटकाफ हाउस से शुरू होकर आश्रम के पास डीएनडी फ्लाईवे तक जाएगा. इसमें आजादपुर चौक से मेटकाफ हाउस जंक्शन तक 7 किलोमीटर, मजनू का टीला से सलीलगढ़ किला तक 5 किलोमीटर और सलीलगढ़ किला से डीएनडी फ्लाईवे तक का हिस्सा शामिल है. रैंप और कनेक्टिंग रोड को मिलाकर इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई करीब 80 किलोमीटर हो जाएगी.

यमुना नदी पर बनेंगे दो नए आधुनिक पुल

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यमुना नदी पर बनने वाले दो नए आधुनिक पुल हैं. पहला पुल पुराने लोहे के पुल के पास बनाया जाएगा जो इस बेहद पुराने ढांचे की जगह लेगा. इसके बनने से आईटीओ ब्रिज और कश्मीरी गेट के पास युधिष्ठिर सेतु पर गाड़ियों का दबाव बहुत कम हो जाएगा. यह पुल उत्तर-पूर्वी, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली को सीधे आश्रम के पास डीएनडी फ्लाईवे से जोड़ देगा जिससे पूर्व-पश्चिम की कनेक्टिविटी बहुत मजबूत होगी. दूसरा पुल मेटकाफ हाउस के पास चंदगीराम अखाड़ा के नजदीक बनेगा जो यमुना पार कराकर सीधे उत्तर-पूर्वी दिल्ली, आईटीओ और मयूर विहार तक का रास्ता सुगम करेगा. यह हिस्सा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा, जिससे नोएडा, गाजीबाद और पूरे एनसीआर के लिए सीधा रास्ता मिल जाएगा.

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दोगुनी हो जाएगी गाड़ियों की रफ्तार

एक रिपोर्ट के मुताबिक महात्मा गांधी मार्ग यानी रिंग रोड पर हर दिन करीब पांच लाख गाड़ियां गुजरती हैं और रास्ते में 11 बड़े चौराहे आते हैं. पीक आवर्स के दौरान भारी जाम की वजह से यहां गाड़ियों की औसत रफ्तार घटकर सिर्फ 23.79 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है. इस नए एलिवेटेड कॉरिडोर के बनने के बाद गाड़ियों की औसत रफ्तार बढ़कर लगभग 45 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी और पूरा सफर बिना किसी ट्रैफिक सिग्नल यानी रेड लाइट के पूरा होगा. पीडब्ल्यूडी मंत्री ने बताया कि पहले चरण में जमीन अधिग्रहण जैसी चुनौतियां बहुत कम हैं, इसलिए इसका निर्माण कार्य जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा. इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली सरकार केंद्र सरकार से भी आर्थिक मदद मांगेगी. बाद के चरणों में इसका विस्तार मूलचंद, एम्स और राजौरी गार्डन होते हुए वापस आजादपुर तक किया जाएगा.

अहम फायदे

  • पूरी तरह सिग्नल-फ्री सफर: इस एलिवेटेड रोड के बनने के बाद वाहन चालकों को किसी भी रेड लाइट या ट्रैफिक सिग्नल पर रुकना नहीं पड़ेगा और पूरी दिल्ली का सफर बिना रुके पूरा होगा.
  • गाड़ियों की रफ्तार होगी दोगुनी: वर्तमान में भारी जाम के कारण रिंग रोड पर गाड़ियों की औसत स्पीड सिर्फ 23.79 किमी प्रति घंटा रह जाती है, जो इस कॉरिडोर के बनने के बाद बढ़कर 45 किमी प्रति घंटा हो जाएगी.
  • यमुना पर दो नए पुल: पुराने और जर्जर हो चुके लोहे के पुल (लोहे का पुल) की जगह एक नया आधुनिक पुल बनेगा. इसके अलावा चंदगीराम अखाड़ा के पास दूसरा नया पुल तैयार किया जाएगा.
  • एनसीआर के लिए आसान कनेक्टिविटी: चंदगीराम अखाड़े के पास बनने वाला पुल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से सीधे कनेक्ट होगा, जिससे नोएडा, गाजीबाद, मेरठ और देहरादून आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा.
  • जल्द शुरू होगा काम: पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश साहिब सिंह के अनुसार पहले चरण में जमीन अधिग्रहण की कोई बड़ी चुनौती नहीं है, इसलिए इसका निर्माण कार्य बहुत जल्द शुरू कर दिया जाएगा.
  • प्रदूषण और हादसों में कमी: इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद दिल्ली में गाड़ियों के रेंगने से होने वाले प्रदूषण को कम करना, ईंधन बचाना और सड़क हादसों पर लगाम लगाना है.
  • केंद्र से वित्तीय मदद: चूंकि इस मेगा प्रोजेक्ट में बहुत बड़ा निवेश शामिल है, इसलिए दिल्ली सरकार इसके बजट के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता मांगेगी.