Namo Bharat Express: दिल्ली से ऋषिकेश जाने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक खुशखबरी आई है. सड़क मार्ग से ऋषिकेश की यात्रा हमेशा से लोगों की पसंदीदा रही है, लेकिन लंबे ट्रैफिक जाम और थकाऊ रास्तों की वजह से यह सफर काफी मुश्किल भरा होता है. अब इस परेशानी का एक बहुत बड़ा और आधुनिक समाधान निकलने जा रहा है. उत्तराखंड के इस आध्यात्मिक शहर तक नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी आरआरटीएस के विस्तार के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है. इस हाई-स्पीड रेल कनेक्शन के शुरू होने के बाद दिल्ली से ऋषिकेश के बीच का सफर सिमटकर सिर्फ तीन घंटे का रह जाएगा, जिससे यात्रियों के समय की बड़ी बचत होगी.
वीकेंड टूरिस्टों को मिलेगी बड़ी राहत
ऋषिकेश उत्तर भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है, जहां लोग वीकेंड की छुट्टियां बिताने, योग सीखने, रिवर राफ्टिंग के रोमांच और धार्मिक यात्रा के लिए बड़ी संख्या में आते हैं. फिलहाल दिल्ली से जाने वाले लोगों को व्यस्त हाईवे पर लंबे घंटे बिताने पड़ते हैं और भारी ट्रैफिक के दिनों में यह दूरी तय करने में छह घंटे से भी ज्यादा का समय लग जाता है. नमो भारत के इस नए रूट से यह पूरी तस्वीर बदलने वाली है. यह नया कॉरिडोर न केवल उत्तराखंड घूमने जाने वाले पर्यटकों के लिए बल्कि दोनों राज्यों के बीच रोजाना आने-जाने वाले स्थानीय यात्रियों के लिए भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहद मजबूत और सुगम बना देगा.
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मुजफ्फरनगर और हरिद्वार भी होंगे कनेक्ट
सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक नमो भारत ट्रेन का यह नया विस्तार रूट मेरठ के मोदीपुरम से शुरू होकर लगभग 150 किलोमीटर की दूरी तय करेगा. यह हाई-स्पीड कॉरिडोर रास्ते में मुजफ्फरनगर, रुड़की और हरिद्वार जैसे प्रमुख शहरों से होते हुए ऋषिकेश में मशहूर लक्ष्मण झूला के पास जाकर समाप्त होगा. इस बड़े प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए संबंधित अथॉरिटी जल्द ही डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर पर काम शुरू करने वाली है. यह डीपीआर ही तय करेगी कि ट्रेन का तकनीकी रूट कैसा होगा, स्टेशन कहां-कहां बनाए जाएंगे, इंफ्रास्ट्रक्चर की क्या जरूरतें होंगी और इस पूरे कॉरिडोर का अंतिम खाका किस तरह तैयार किया जाएगा.
व्यापार और तीर्थाटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
नमो भारत ट्रेनें पूरी तरह से सेमी-हाई-स्पीड रैपिड ट्रांजिट सिस्टम पर आधारित हैं, जो पटरियों पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती हैं. एक बार इसके शुरू हो जाने के बाद यात्रियों को सड़क के गड्ढों और जाम से मुक्ति मिलकर एक बेहद सुरक्षित, भरोसेमंद और आरामदायक सफर का विकल्प मिलेगा. पर्यटन के अलावा इस प्रोजेक्ट से हरिद्वार और ऋषिकेश आने वाले तीर्थयात्रियों को बहुत सुविधा होगी, जिससे स्थानीय व्यापार को रफ्तार मिलेगी और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के शहरों के बीच आवाजाही आसान होगी. दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक का 82 किलोमीटर का पहला कॉरिडोर जनवरी 2025 में ही शुरू हो चुका है और अब यह विस्तार देश के रैपिड रेल नेटवर्क में एक नया अध्याय जोड़ेगा.