दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव के नतीजों का आज ऐलान हुआ. इस बीच एक नाम है जिसने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वो है दीपांशु शौकीन. दिल्ली के पीरागढ़ी के रहने वाले दीपांशु निर्दलीय ही उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़े और जीत भी गए. उन्होंने ABVP और NSUI समेत सभी दलों को पछाड़ दिया. दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले, वहीं ABVP के यश डबास के पाले में 24,576 वोट आए.

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कौन हैं दीपांशु शौकीन?

दीपांशु शौकीन के पिता बस कंडक्टर हैं, जबकि मां आंगनवाड़ी वर्कर है. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन की और वो फिलहाल डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के स्टूडेंट हैं. दरअसल, दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के चुनाव लड़ने के लिए NSUI से टिकट मांगा था. उन्हें टिकट मिल भी गई, नामांकन भी हो गया. लेकिन बाद में NSUI ने उन्हें नोमिनेशन वापस लेने के लिए कहा. शौकीन ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया और निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. उन्होंने ABVP और NSUI के खिलाफ खुलकर बगावत करने की ठान ली.

कैसे बढ़ा दीपांशु का क्रेज?

सत्य निकेतन इमारत हादसे के दौरान दीपांशु शौकीन ने जूते उतारने का ऐलान किया था और ये कहा था कि जब तक छात्रों के साथ इंसाफ नहीं होता, तब तक वो जूते नहीं पहनेंगे. अपने इस कदम से वो स्टूडेंट पॉलिटिक्स में रातोंरात हीरो बन गए और इसका नतीजा आज चुनाव के नतीजों में दिखा. दरअसल, शौकीन बचपन से ही पढ़ाई में बहुत तेज थे, इसलिए उनके पिता का सपना था कि वो UPSC की तैयारी करें, लेकिन दीपांशु हमेशा से ये चाहते थे कि वो राजनीति में ही जाएं. उन्होंने पॉलिटिक्स में जाने के लिए छात्र राजनीति को पहली सीढ़ी बनाया और उसे पार भी कर लिया.

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