'अब हम कहां जाएं…', यमुना बाजार में DDA का बुलडोजर, 5 पीढ़ियों का आशियाना जमींदोज

प्रशासन की ओर से जारी 23 जून के नोटिस में साफ कहा गया था कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार यमुना नदी के तटीय क्षेत्रों को हर तरह के अतिक्रमण से मुक्त कराया जाना है.

Yamuna Bazar Demolition

यमुना के किनारे जिन परिवारों की पांच से छह पीढ़ियां बीत गईं, आज उनके पास सिर छुपाने के लिए छत तक नहीं बची है. दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा यमुना बाजार इलाके में चलाई गई ताबड़तोड़ डिमोलिशन ड्राइव ने महज कुछ ही दिनों में 310 परिवारों का सब कुछ छीन लिया है. उनका रोजगार, समाज, घर और जीने का जरिया – सब कुछ मलबे में तब्दील हो चुका है. एनजीटी के आदेशों का हवाला देते हुए डीडीए ने इस पूरे इलाके को ‘ओ-जोन’ घोषित कर यह कार्रवाई की है.

विज्ञापन

23 जून का नोटिस और अचानक आई आफत

प्रशासन की ओर से जारी 23 जून के नोटिस में साफ कहा गया था कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार यमुना नदी के तटीय क्षेत्रों को हर तरह के अतिक्रमण से मुक्त कराया जाना है. लेकिन कानूनी दलीलों और नियमों से बेखबर इन परिवारों के लिए यह कार्रवाई किसी कयामत से कम नहीं थी. प्रभावित लोगों का आरोप है कि उन्हें अपना सामान समेटने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया गया.

विज्ञापन

पीढ़ियों से घाटों से जुड़ा था नाता

बेघर हुए लोगों में अधिकांश लोग नाविक, नाई, पुजारी और फूल-माला बेचने वाले हैं, जो मूल रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश से आकर यहां बसे थे. इनका काम कोई साधारण नौकरी नहीं है जिसे कहीं भी ट्रांसफर किया जा सके; यह सदियों पुरानी ‘जजमानी व्यवस्था’ से बंधा हुआ था.

विज्ञापन

गौरी शंकर नामक निवासी ने बताया कि ब्रिटिश काल से उनका परिवार घाट नंबर 24 पर पुजारियों का काम कर रहा है. अब जब ये लोग ही नहीं रहेंगे, तो दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अपने धार्मिक अनुष्ठान कैसे पूरे करेंगे?

विज्ञापन

1905 के कागजात, फिर भी नहीं बची छत

एक स्थानीय मंदिर में शरण लेने वाली 66 वर्षीय राजरानी ने बताया कि उनके पास साल 1905 के वैध दस्तावेज हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके आशियाने को ढहा दिया गया. दर्द की बात यह भी है कि प्रशासन ने कथित तौर पर अन्य लोगों को बेघर हुए लोगों को शरण न देने की हिदायत दी है.

एनडीटीवी से बात करते हुए मनीष ने कहा, ‘हम भीख नहीं मांगेंगे सर. साल 2005 से हम यहां रह रहे थे, खून-पसीने से घर बनाया था जिसे आज उजाड़ दिया गया. यह कैसी सरकार है जो हंसते-खेलते परिवार को सड़क पर ले आई?’

विज्ञापन

पूर्वजों का रिकॉर्ड रखने वाले हुए बेदखल

घाटों पर पले-बढ़े गणेश पंडित ने रोते हुए कहा, ‘हरियाणा और देश के कोने-कोने से लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान और रिकॉर्ड देखने हमारे पास आते हैं. आज हमें ही बेदखल कर दिया गया है. हमें सिर्फ पूजा करने की अनुमति है, पर हम रहने के लिए किराए का घर कहां से ढूंढें?’

विज्ञापन

सबसे बुरा हाल 70 और 80 वर्ष के उन बुजुर्गों का है जिन्होंने पूरी जिंदगी इन्हीं घाटों पर बिता दी. लीलाधर और प्रभु दयाल जैसे बुजुर्ग अपने बचे-खुचे सामान को रिक्शे पर लादकर अनजान मंजिलों की ओर जाने को मजबूर हैं.

विज्ञापन

पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं

दिल्ली में इस समय भीषण गर्मी और बारिश का मौसम है, लेकिन इसके बावजूद विस्थापित हुए इन परिवारों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए रहने या पुनर्वास की कोई वैकल्पिक व्यवस्था सरकार या प्रशासन द्वारा नहीं की गई है.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Arif Khan

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ