सूरज की तपिश और आसमान से बरसती आग ने दिल्लीवालों का जीना मुहाल कर दिया है. ऐसे में जब गला सुखाने वाली गर्मी पड़ रही हो, तब घर के नलों का सूखा पड़ जाना किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है. सुबह उठते ही पानी की किल्लत और बाल्टियों की कतारें अब दिल्ली के कई इलाकों की पहचान बन चुकी हैं. चिलचिलाती धूप के बीच राजधानी में अचानक पैदा हुआ यह जलसंकट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और उनके लाइफस्टाइल को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. दिल्ली में पानी की को लेकर बड़ी खबर सामने आई है, जिसे शहर के कई इलाकों को परेशान होना पड़ रहा है.

यह भी पढ़ें: Delhi Water Crisis: दिल्ली के 30 से ज्यादा इलाकों में कई दिनों तक ...

---विज्ञापन---

क्यों सूख गए दिल्लीवालों के हलक?

इस भारी किल्लत के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण सामने आए हैं. पहला यह कि यमुना नदी में अमोनिया का प्रदूषण स्तर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिससे पानी साफ करने में दिक्कत आ रही है. दूसरा कारण पड़ोसी राज्य हरियाणा से दिल्ली को मिलने वाले कच्चे पानी की मात्रा में आई कमी है. इन दोनों वजहों से दिल्ली के दो सबसे महत्वपूर्ण वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (जल शोधन संयंत्र) वजीराबाद और चंद्रावल अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं, जिससे पानी का उत्पादन घट गया है. इस उत्पादन के घटने से दिल्ली के कई इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है.

---विज्ञापन---

इन इलाकों में मचेगी हाहाकार,

इस संकट का सबसे ज्यादा असर नई दिल्ली (NDMC) के वीआईपी क्षेत्रों और उत्तरी दिल्ली के कई रिहायशी इलाकों में देखने को मिल रहा है. आंकड़ों की बात करें तो वजीराबाद प्लांट में लगभग 10 फीसदी और चंद्रावल प्लांट में 15 फीसदी तक शुद्ध पेयजल की सप्लाई कम हुई है. पानी की इस कमी के कारण लोगों को सुबह के जरूरी कामों, खाना पकाने और नहाने-धोने जैसे दैनिक कार्यों के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है, जिससे उनका पूरा रूटीन बिगड़ गया है.

---विज्ञापन---

कब तक सामान्य होगी पानी की सप्लाई?

हालांकि, इस परेशानी के बीच दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को सुधारने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं. पानी की पूरी मात्रा को बहाल करने के लिए हरियाणा सरकार के अधिकारियों से लगातार बातचीत की जा रही है. प्रशासन को उम्मीद है कि अगले दो दिनों के भीतर यमुना में अमोनिया का स्तर कम हो जाएगा और दोनों प्रभावित प्लांट फिर से पूरी क्षमता से काम करने लगेंगे, जिससे दिल्लीवालों को इस भीषण किल्लत से राहत मिल जाएगी.

---विज्ञापन---

इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर पड़ेगा

वजीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े मजनू का टीला, आईएसबीटी, जीपीओ, एनडीएमसी क्षेत्र, आईटीओ, हंस भवन, एलएनजेपी अस्पताल, डिफेंस कॉलोनी, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, राजघाट, आईपी इमरजेंसी, रामलीला मैदान, दिल्ली गेट, सुभाष पार्क, गुलाबी बाग, तिमारपुर, एसएफएस फ्लैट्स, पंजाबी बाग, आजादपुर, शालीमार बाग, वजीरपुर, लॉरेंस रोड, मॉडल टाउन, जहांगीरपुरी, मूलचंद, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, बुराड़ी, कैंटोनमेंट क्षेत्र और चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े एनडीएमसी क्षेत्र, करोल बाग, झंडेवालान, हिंदूराव, सिविल लाइंस, पटेल नगर, राजेंद्र नगर और शादीपुर जैसे इलाकों में भी जलापूर्ति प्रभावित हैं. गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले इन दोनों प्लांट में पानी उत्पादन को लेकर खबर सामना आई थी, जिसमें अमोनिया का लेवल बढ़ने के कराण सप्लाई प्रभावित हुई थी, ऐसे में हरियाणा से पानी की कमी इस खतरे को और बढ़ा दी है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: दिल्ली-NCR को मिलेगी नई रफ्तार: गडकरी ने किया DND-फरीदाबाद-सोहना हाईवे परियोजना