राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा शामिल हुए. बैठक के बाद पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने साफ किया कि दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ (No PUCC, No Fuel) नीति को अब और ज्यादा सख्ती से लागू किया जाएगा. यानी वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUCC) न होने पर गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा.
हर 15 दिन में सड़कों की होगी डीप क्लीनिंग
सड़कों से उड़ने वाली धूल को खत्म करने के लिए सरकार ने हर 15 दिन में ‘डीप क्लीनिंग’ कराने की योजना बनाई है. इसके लिए हर गाड़ी में चार सदस्यों की विशेष टीम तैनात होगी, जिसमें दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और एमसीडी (MCD) के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे. साथ ही दिल्ली पुलिस के साथ भी तालमेल बिठाया गया है.
धूल रोकने के लिए सड़कों के किनारों पर जनभागीदारी अभियान के जरिए हरियाली और ‘ब्राउन पैच’ विकसित किए जाएंगे, जिससे उड़ने वाली मिट्टी को रोका जा सके.
ठंड से बचाव के लिए बनेंगे ‘हीटिंग स्पॉट्स’
सर्दियों में खुले में कचरा और आग जलाने से रोकने के लिए ‘जीरो बर्निंग’ पहल के तहत इस बार खास ‘हीटिंग स्पॉट्स’ और अस्थायी रैन बसेरे बनाए जाएंगे. इनमें ठंड से बचाव के पुख्ता इंतजाम होंगे, ताकि लोग खुले में अलाव या कचरा न जलाएं.
150 नई इलेक्ट्रिक बसें और हॉटस्पॉट्स पर निगरानी
सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली में चल रहीं 588 इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े में जल्द ही 150 और नई बसें जोड़ी जाएंगी. मंत्री सिरसा ने बताया कि पहचाने गए 62 प्रदूषण हॉटस्पॉट्स में से 42 पर हालात काबू में आ चुके हैं. बाकी 20 हॉटस्पॉट्स के 3 किलोमीटर के दायरे में आने वाले श्मशान घाट, कूड़े के डंपिंग यार्ड और कंस्ट्रक्शन साइट्स की समीक्षा के लिए वह खुद सभी 11 जिलाधिकारियों (DM) के दफ्तरों का दौरा कर रहे हैं.