Chilla Elevated Road: दिल्ली और नोएडा के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है. लंबे समय से अटके हुए चिल्ला एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट ने अब रफ्तार पकड़ ली है और इसका लगभग 47 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. 5.5 किलोमीटर लंबा यह सिक्स-लेन कॉरिडोर दिल्ली और नोएडा के बीच सीधा संपर्क स्थापित करेगा, जिससे सड़क पर लगने वाले भीषण जाम से लोगों को निजात मिलेगी. अधिकारियों का कहना है कि जिस तेजी से काम चल रहा है, उसे देखते हुए यह प्रोजेक्ट जून 2027 तक जनता के लिए खोला जा सकता है. यह समय सीमा तय डेडलाइन से भी कई महीने पहले की है, जो मुसाफिरों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है.

नोएडा एंट्री पॉइंट पर खत्म होगा ट्रैफिक का सिरदर्द

यह एलिवेटेड रोड मुख्य रूप से उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो नोएडा एंट्री गेट और महामाया फ्लाईओवर के आसपास लगने वाले महाजाम में घंटों फंसे रहते हैं. इस नए रास्ते के शुरू होने से नोएडा एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों का दबाव काफी कम हो जाएगा और दिल्ली से ग्रेटर नोएडा की ओर जाना बेहद आसान हो जाएगा. इसके अलावा यह कॉरिडोर उन यात्रियों के लिए भी बहुत मददगार होगा जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर जाना चाहते हैं. सुबह और शाम के व्यस्त समय में मयूर विहार से महामाया फ्लाईओवर के बीच जो गाड़ियां रेंगती हुई नजर आती थीं, वे अब फर्राटा भरते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगी.

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फाउंडेशन का काम पूरा और अब सुपरस्ट्रक्चर की बारी

प्रोजेक्ट की तकनीकी प्रगति की बात करें तो निर्माण कार्य बहुत ही व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहा है. जानकारी के मुताबिक इस एलिवेटेड रोड के लिए जरूरी सभी 85 खंभों यानी पियर्स का निर्माण पूरा कर लिया गया है और फाउंडेशन का काम भी खत्म हो चुका है. अब इंजीनियरों का पूरा ध्यान पियर कैप बनाने और सुपरस्ट्रक्चर को तैयार करने पर है. इसके बाद सड़क को सहारा देने वाले गार्डर और प्रीकास्ट सेगमेंट लगाए जाएंगे. अगले चरणों में डेक स्लैब बिछाने, सड़क की सतह तैयार करने, लाइटिंग लगाने और सुरक्षा बैरियर बनाने का काम किया जाएगा. मार्च 2023 से काम में आई तेजी ने इस प्रोजेक्ट में नई जान फूंक दी है.

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बरसों की देरी के बाद अब पूरा होगा सपना

आपको बता दें कि चिल्ला एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव पहली बार साल 2012 में रखा गया था, लेकिन पिछले कई सालों में यह प्रोजेक्ट कई रुकावटों का शिकार रहा. फंड की कमी, पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी और कोरोना महामारी की वजह से काम काफी समय तक रुका रहा, जिससे इसकी लागत 605 करोड़ से बढ़कर करीब 893 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. साल 2020 तक इस प्रोजेक्ट का केवल 13 प्रतिशत हिस्सा ही तैयार हो पाया था, लेकिन अब सभी बाधाएं दूर कर ली गई हैं. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि अब फंड या निर्माण सामग्री की कोई कमी नहीं है और यह प्रोजेक्ट अब सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है ताकि लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके.

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