खबर की मुख्य बातें:-
- दिल्ली के चारों तरफ तीन बड़े 'ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर' (Orbital Rail Corridor) के नेटवर्क पर काम शुरू कर दिया है.
- महा-परियोजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के भीतर प्रवेश किए बिना हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों और शहरों को आपस में सीधे जोड़ना है.
- इस परियोजना के तहत 3 महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर बनाएं जाएंगे.
दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाले समय में यातायात की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है. राजधानी को भीषण ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण से बचाने के लिए दिल्ली के चारों तरफ तीन बड़े 'ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर' (Orbital Rail Corridor) के नेटवर्क पर काम शुरू कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीआर मास्टर प्लान 2041 के तहत बनाई जा रही इस महा-परियोजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के भीतर प्रवेश किए बिना हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों और शहरों को आपस में सीधे जोड़ना है. इस नए रेल नेटवर्क के शुरू होने से न सिर्फ आम यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि मालगाड़ियों को भी दिल्ली के बीच से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे समय और ईंधन दोनों की बड़ी बचत होगी.
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क्या है कॉरिडोर का मैप
योजना के तहत तैयार किए जा रहे पहले तीर रेल कॉरिडोर की रूपरेखा काफी मजबूत है, जो एनसीआर के विकास को एक नई दिशा देंगे.
पहला रेल कॉरिडोर (पलवल से सोनीपत):
इस महत्वाकांक्षी नेटवर्क की पहली कड़ी 'हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर' है, जिसका निर्माण केजीपी एक्सप्रेसवे के साथ-साथ हरियाणा के सोनीपत से पलवल के बीच तेजी से चल रहा है. इसके साथ ही पलवल-खुर्जा-मेरठ-बागपत-सोनीपत वाले हिस्से को जोड़कर दिल्ली के चारों तरफ पहला पूरा रेल घेरा बनाने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा गया है.
दूसरा रेल कॉरिडोर (सोनीपत से पानीपत):
इस दूसरे बड़े घेरे में सोनीपत, शामली, मेरठ, जेवर, नूंह, भिवाड़ी, रेवाड़ी, झज्जर, रोहतक और पानीपत जैसे बड़े शहरों को शामिल किया गया है. यह रूट उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने के साथ-साथ आगामी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, भिवाड़ी और रेवाड़ी के बड़े औद्योगिक हब को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा.
तीसरा सबसे बड़ा कॉरिडोर
इस पूरी योजना की तीसरी कड़ी सबसे बड़ी और व्यापक होगी, जो वर्तमान में सिर्फ वैचारिक (प्लानिंग) स्तर पर है. अगर यह प्रोजेक्ट व्यावहारिक पाया जाता है, तो यह मुख्य एनसीआर के सबसे बाहरी और सुदूर जिलों में लॉजिस्टिक और व्यापार के नए द्वार खोल देगा. इस महा-रूट के तहत करनाल, जींद, भिवानी, महेन्द्रगढ़, नारनौल, बहरोड़, अलवर (राजस्थान), डिबाई, गढ़मुक्तेश्वर, हस्तिनापुर, मुजफ्फरनगर और वापस करनाल के बीच बेहतर और मजबूत कनेक्टिविटी मिस सकेगी. माना जा रहा है कि यह विशाल घेरा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान के अलवर और बहरोड़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को सीधे जोड़ देगा, जिससे इन इलाकों में विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी.
कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
फिलहाल कुंडली-मानेसर-पलवल रेल कॉरिडोर पर निर्माण कार्य जारी है और बताया जा रहा है कि इसका करीब 30 फीसदी काम पूरा हो चुका है. यह लगभग 126 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर है, जिसे बड़े क्षेत्रीय रेल नेटवर्क की पहली मजबूत कड़ी माना जा रहा है. इस परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर आगे यूपी और अन्य हिस्सों के लिए योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा. अनुमान है कि मौजूदा कॉरिडोर को साल 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
इस परियोजना से संभावित बड़े फायदे:
- दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, सोनीपत, पलवल जैसे इलाकों में सड़क जाम का दबाव घट सकता है.
- लोगों का सफर समय कम होगा और रोजाना यात्रा ज्यादा आसान हो सकती है.
- माल ढुलाई तेज होने से कारोबार और इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा.
- निजी वाहनों की निर्भरता कम होने से प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है.
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